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किसानों ने सरकार के लिए कानून का मसौदा बनाया
चंडीगढ़: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलनरत किसान सिर्फ नरेंद्र मोदी सरकार की तरफ लागू किए गए तीन नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की ही मांग नहीं कर रहे हैं. वे चाहते हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को उनका कानूनी अधिकार बनाया जाए. किसान सरकार से एक नया कानून बनाने की मांग कर रहे हैं जो फसलों की 'गारंटीशुदा पारिश्रमिक एमएसपी' (जीआरएमएसपी) से नीचे खरीद को एक संज्ञेय दंडनीय अपराध बना दे.
अपनी पांच दौर की वार्ता के दौरान किसान नेताओं की ओर से सरकार को सौंपे गए प्रस्तावित मसौदा कानून में एक प्रमुख मांग जीआरएमएसपी ही है.
यह मांग उन नौ मांगों संबंधी चार्टर का हिस्सा भी थी, जिसे आंदोलनकारी किसान संघों की एकीकृत इकाई अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने जुलाई में प्रधानमंत्री मोदी को भेजा था. यह प्रस्ताव दिप्रिंट के पास भी उपलब्ध है.
मसौदा प्रस्ताव में कहा गया है कि पूरे भारत में हर किसान किसी भी कृषि उपज की बिक्री के लिए जीआरएमएसपी के तहत भुगतान का हकदार होगा. किसान चाहते हैं कि एपीएमसी सहित भारत के सभी कृषि बाजारों में हर कृषि उपज के लिए नीलामी या प्रस्ताव मूल्य की शुरुआत जीआरएमएसपी को आधार मूल्य मानकर की जाए यानी उससे कम मूल्य पर नीलामी की अनुमति नहीं होगी.
मसौदा प्रस्ताव के अनुसार कोई भी व्यापारी, जिसमें कांट्रैक्ट फार्मिंग के तहत अनुबंध करने वाले व्यापारी भी शामिल हों, जीआरएमएसपी से नीचे कोई भी वस्तु नहीं खरीदेगा. किसी व्यापारी का ऐसा करना एक संज्ञेय अपराध माना जाएगा.
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