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समाचारविदेश Alert Star Digital Team Dec 8, 2020 09:14 PM

एवरेस्ट की उंचाई लगभग एक मीटर तक बढ़ी

एवरेस्ट की उंचाई लगभग एक मीटर तक बढ़ी

एवरेस्ट की उंचाई लगभग एक मीटर तक बढ़ी

पाल और चीन ने संयुक्त रूप से माउंट एवरेस्ट को दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी बताते हुए इसकी ऊंचाई 8,848.86 मीटर बताया है.

यह माउंट एवरेस्ट की पुरानी मान्य ऊंचाई से 86 सेंटीमीटर ज्यादा है.

लिखित संदेश में नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने कहा है, 'इस ऐतिहासिक मौक़े पर दोनों देशों के सर्वे विभाग की ओर से संयुक्त तौर पर मापने की प्रक्रिया पूरी करने के बाद मैं माउंट सागरमाथा/चोमोलोंगमा की नई ऊंचाई 8,848.86 मीटर मान्यवर आपके साथ (चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग) संयुक्त रूप से घोषित करते हुए ख़ुश हूँ.'

माउंट एवरेस्ट को नेपाल में सागरमाथा और तिब्बत में चोमोलोंगमा कहते हैं. यह इन दोनों ही देशों में फैला हुआ है लेकिन इसकी चोटी नेपाल की सीमा में स्थित है.

नेपाल और चीन की सर्वे टीम ने अलग-अलग एवरेस्ट की ऊंचाई नापी है. अब तक चीन एवरेस्ट की ऊंचाई दुनिया भर में मान्य इसकी ऊंचाई को नहीं मानता रहा है और इसे चार मीटर कम कर के आंकता रहा है.

अभी तक जो मान्य ऊंचाई है, उसका निर्धारण ब्रितानी राज में भारतीय सर्वे विभाग की ओर से किया गया था.

2017 में माउंट एवरेस्टी की ऊंचाई मापने की शुरुआत नेपाल की ओर से शुरू की गई थी. 2015 में आए भूकंप के बाद इसे मापने का फ़ैसला किया गया था क्योंकि ऐसा कहा गया था कि भूकंप का दुनिया की इस सबसे ऊंची चोटी पर असर पड़ा है.

कई बार इस चोटी का माप लिया जा चुका है लेकिन नेपाल ने पहली बार इसे मापने का काम किया है.

बाद में चीन ने भी इसकी नपाई शुरू की और नेपाल और चीन ने अपने डेटा शेयर किए और संयुक्त बयान जारी कर अपने महत्वपूर्ण नतीजें जारी किए. इस पर नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी और शी जिनपिंग ने 2019 में हस्ताक्षर किए.

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