होम डॉ जगदीश गाँधी लखनऊ विश्वविद्यालय का वह रत्न जिसने दुनिया को दिया अमन और शांति का पैगाम

समाचारदेश Alert Star Digital Team Nov 29, 2020 07:02 PM

डॉ जगदीश गाँधी लखनऊ विश्वविद्यालय का वह रत्न जिसने दुनिया को दिया अमन और शांति का पैगाम

डॉ जगदीश गाँधी लखनऊ विश्वविद्यालय का वह रत्न जिसने दुनिया को दिया अमन और शांति का पैगाम

डॉ जगदीश गाँधी लखनऊ विश्वविद्यालय का वह रत्न जिसने दुनिया को दिया अमन और शांति का पैगाम

उत्तर प्रदेश की राजधानी में लखनऊ यूनिवर्सिटी को  नवम्बर 2020 मे 100 वर्ष पुरे हो गए हैं, लखनऊ विश्वविद्यालय ने एक भारत श्रेष्ठ भारत को भी  आगे बढ़ाया। इसने राष्ट्रपति दिए, न्यायमूूर्ति दिए, राजनेता, अफसर, आचार्य और वैज्ञानिक भी दिए हैं, बड़े व्यापारी भी दिए हैं, जब हम मूल्यांकन करेंगे तब एक-एक उपलब्धि दिखाई देगी इन्ही मे एक ऐसा मोती जो आज भी अपनी चमक विखेर रहा है वह है डॉ जगदीश गाँधी  दुनिया सियासत करती रही और अपनी हनक में धीरे धीरे बारूद के ढेर पर आकर बैठ गई अपनी सियासत ,अपनी ताकत ,अपनी विरासत ,अपनी सीमाएं और अपना मुल्क की अवधारणा पर चलते हुए विश्व की बिरादरी ने खुद को इतना विभाजित कर लिया कि इनके एक राह पर आने के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता लेकिन भारत जहां महात्मा गांधी ने विश्व को शांति और अहिंसा का पाठ पढ़ाया उसी भारत में महात्मा गांधी के पदचिन्हों पर चलते हुए एक और गांधी जो विश्व बिरादरी को एक ही माला में मोतियों के रूप में पिरो देना चाहते हैं , जय जगत की आवाज को हथियार बनाते हुए विश्व बंधुत्व की परिपाटी को एक आयाम देने का प्रयास करने वाले डॉक्टर जगदीश गांधी हैं  और वह भी लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं ।

                ऐसा भारत जब गुलामी की जंजीरों में जकड़ा थाए देश में आजादी को लेकर एक जंग छिड़ी थी ऐसे माहौल में 10 नवंबर 1936को अलीगढ़ के ग्राम बरसौली के एक खेतिहर परिवार में पैदा हुआ। यह बालक बचपन से ही उन रास्तों को तलाशने लगा जिनको समझने में ही लोगों की आधी उम्र बीत जाती है । अपने चाचा प्रभु दयाल से प्रेरणा ले यह बालक बचपन मे ही बच्चों को संगठित कर लोगों में देश प्रेम की भावना जागृत करते हुए प्रभात प्रभातफेरियां निकालने लगा । 1948 में महात्मा गांधी की हत्या ने उन्हें इतना अंदर तक झकझोर दिया था कि उन्होंने अपने नाम के साथ ही गांधी शब्द जोड़कर सत्य ,अहिसा , सादगी ,सेवा और विश्व एकता कि वह राह उस उम्र मे ही पकड़ ली थी जिस उम्र में बच्चे खिलौनों को लेकर रूठ जाते हैं।बालमन जिस तरह से गांधी की नीतियों की ओर झुका वह अदभुत था बचपन से ही शिक्षा में अव्वल रहने वाले जगदीश गांधी ने भी बी काम की पढ़ाई के दौरान अपनी फीस और खाने की व्यवस्था के लिए लोगों के घरों में अखबार तक डालें ।1958 में लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके गांधी जी यह मानते हैं कि देश को बेहतर राजनीतिक विकल्प की पूर्ति के लिए विश्वविद्यालय से एक बेहतर गंगोत्री निकल सकती है   वह बीते दिनों को याद करते हुए कहते है की   अपनी उच्च शिक्षा के लिए 1955 में जब मैं अलीगढ़ से निकला तो मुझे नहीं मालूम था कि मैं देश के उस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में पहुंच जाऊगां, जो कि देश के कई महान पुरूषों की जननी रही है। इसी लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए मैंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया और फिर मेरा झुकाव बच्चों की शिक्षा के प्रति बढ़ता ही गया। इसके साथ ही मेरे अंदर समाज के प्रति सेवा की भावना और संघर्षशीलता को बढ़ावा भी इसी लखनऊ विश्वविद्यालय में ही मिला। जिसके कारण मैं 1959 में लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ का प्रेसीडेन्ट बना। इच्छा थी कि देश के तात्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जी लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र संघ भवन का उद्घाटन करें। इसके लिए मैं पहुंच गया दिल्ली। इन्दिरा जी के सहयोग से मैं न केवल नेहरू जी से मिला बल्कि मेरे अनुरोध पर वे 2 मार्च, 1959 को लखनऊ विश्वविद्यालय आये और छात्र संघ भवन का उद्घाटन भी किया। यह सब केवल इसलिए संभव हो सका क्योंकि लखनऊ विश्वविद्यालय की अपनी एक अलग गरिमा थी और जिसे बनाये रखना इस विश्वविद्यालय के प्रत्येक छात्र का उत्तरदायित्व भी है। डॉक्टर गांधी अपनी लखनऊ यूनिवर्सिटी की बातों को याद करते हुए कहते हैं वह समय था जब गुरुजनों का बहुत सम्मान होता था अनुशासनहीनता बिल्कुल नहीं थी और ना ही कोई छात्र अनुशासनहीनता के बारे में सोच सकता था समय-समय पर बड़े-बड़े विद्वानों के व्याख्यान होते थे जिनमें राजनीतिक अर्थशास्त्र शिक्षा सभी तरह के विषय शामिल थे हम लोग गुरुजनों के पैर छूते थे मैं जब प्रेसिडेंट था वाइस प्रेसिडेंट था तब भी अपने शिक्षकों के पैर छूने जाता था लखनऊ यूनिवर्सिटी की इसी गरिमा और माहौल ने  देश को बहुत बड़े-बड़े नाम दिए हैं जिन्होंने देश में रहकर देश के लिए ही नहीं अपित विश्व के लिए भी काम किया है और भारत का गौरव बढ़ाया है।

गांधीजी महात्मा गांधी की बनाई राह पर चलकर बहाई धर्म की शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए मानव कल्याण की परिपाटी पर चलते हुए 21 वी सदी की शिक्षा का स्वरूप विश्वव्यापी और मानव कल्याण का होने की अवधारणा को विकसित करने लगे आपको यश भारती समेत तमाम पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है आपने हृदय को छू लेने वाली तमाम विषयों तथा शिक्षा और अध्यात्म पर दो दर्जन से अधिक पुस्तकें लिखी हैं आप आज भी निरंतर उसी राह और उन्हीं पदचिन्हों पर चल रहे हैं, जो आज से सात .आठ दशक पहले महात्मा गांधी ने अधूरी छोड़ी थी आपके संस्थान से जो संस्कारिक धारा निकलकर विश्व बिरादरी में समाहित हो रही है वह निश्चय ही विश्व में जय जगत का सार्थक सपना साकार करेगी और एक ऐसे विश्व का निर्माण करेगी जहां किसी भी सीमा की अवधारणा ना हो यही जय जगत की मूल भावना है

Alert Star Digital Team

Alert Star Digital Team

एलर्ट स्टार नाम की पत्रिका और फिर समाचार-पत्र का जन्म हुआ। हमारा प्रयास कि हम निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता का वह स्वरूप अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करे। जो लोगो के मन मस्तिष्क में एक भरोसे के रूप में काबिज हो।

Leave A comment

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।

Recent Updates

Most Popular

(Last 14 days)