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बिहार चुनाव: 43 सीटों के साथ नीतीश कुमार के सामने क्या हैं विकल्प?
"बीजेपी एक साथ यहाँ तीन गठबंधन में काम कर रही थी. पहला था, एनडीए गठबंधन, जिसके बारे में सब जानते और मानते थे. बीजेपी का दूसरा गठबंधन लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के साथ था और तीसरा गठबंधन AIMIM के साथ था. इन दोनों गठबंधन के बारे में भी सब जानते थे, लेकिन कोई मानता नहीं था. उम्मीद है कि नीतीश इस बात को अब समझेंगे."
बिहार चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा अब आम है.
बात बहुत छोटी सी है. इसे प्रमाणित करने के लिए बिहार चुनाव के विश्लेषक कई आँकड़े भी गिना रहे हैं. मसलन, कैसे चिराग ने तक़रीबन 20-30 सीटों पर नीतीश की पार्टी जेडीयू को नुक़सान पहुँचाया और कैसे ओवैसी की पार्टी ने तेजस्वी की आरजेडी के मुस्लिम वोट बैंक में सेंधमारी की.
पर जो बात स्थानीय नेताओं को समझ आ गई, क्या 15 साल तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले नीतीश कुमार को समझ नहीं आई होगी? इस पर बहुत से जानकारों को संदेह है.
बिहार चुनाव के नतीजे आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा सब ने ट्वीट किया. सबने बिहार की जनता को धन्यवाद दिया. बीजेपी के कई नेताओं ने आज भी बयान दिए हैं कि बिहार के अगले मुख्यमंत्री नीतीश ही होंगे.
'बिहार के होने वाले मुख्यमंत्री' नीतीश कुमार ने भी ट्वीट किया, "जनता मालिक है. उन्होंने एनडीए को जो बहुमत प्रदान किया, उसके लिए जनता-जनार्दन को नमन है. मैं पीएम नरेंद्र मोदी से मिल रहे उनके सहयोग के लिए धन्यवाद करता हूं."
अब नीतीश कुमार के सामने क्या विकल्प हैं? इसी सवाल के जवाब में सारा गणित छुपा है.
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