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विपक्ष ने राष्ट्रपति से मिलकर कृषि बिल पर हस्ताक्षर नहीं करने की गुहार लगाई
विपक्षी दल के सांसदों ने राष्ट्रपति से गुहार लगाई है कि वो कृषि बिल पर हस्ताक्षर न करें.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार बुधवार शाम राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस के ग़ुलाम नबी आज़ाद के नेतृत्व में विपक्षी दल के सांसदों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाक़ात की.
ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि विपक्षी दलों का यही मानना है कि कृषि बिल ग़ैर-संवैधानिक तरीक़े से पास कराया गया है, इसलिए उनलोगों का राष्ट्रपति से अनुरोध है कि वो बिल पर हस्ताक्षर ना करें.
भारतीय संविधान के अनुसार कोई बिल संसद के दोनों सदनों में पास होने के बाद राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है और उनके दस्तख़त के बाद ही वो बिल क़ानून का रूप लेता है.
इस बीच विपक्षी दल के सांसदों का विरोध प्रदर्शन जारी है. बुधवार को भी उन्होंने सदन की कार्यवाही का बायकॉट किया और संसद परिसर में गांधी मूर्ति से लेकर आंबेडकर मूर्ति तक मार्च किया. उनके हाथों में किसान बचाओ के प्लेकार्ड भी थे.
सत्र के दौरान आठ सांसदों को निलंबित किया गया
राज्यसभा के चेयरमैन एम वेंकैया नायडू ने सोमवार को सदन के आठ सदस्यों को उनकी अनुशासनहीनता के लिए निलंबित कर दिया था.
राज्यसभा के ये सदस्य हैं- डेरेक ओ ब्रायन (टीएमसी), संजय सिंह (आप), राजू सातव (कांग्रेस), केके रागेश (सीपीएम), रिपुन बोरा(कांग्रेस), डोला सेन (टीएमसी), सैय्यद नासिर हुसैन(कांग्रेस) और इलामारन करीम (सीपीएम).
वेंकैया नायडू के अनुसार रविवार को कृषि बिल पास करने के दौरान इन सांसदों ने उपसभापति हरिवंश को डराने की कोशिश की, उन्हें अपना काम करने से रोकने की कोशिश की.
लेकिन निलंबित हुए सांसदों का कहना था कि उपसभापति ने बिल को ध्वनिमत से पास घोषित कर दिया जबकि विपक्ष इस पर मत विभाजन कराने की माँग कर रहा था.
आख़िरी दिन तीन श्रम विधेयक पारित
निर्धारित समय से आठ दिन पहले ही बुधवार को राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई.
गृह राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने बुधवार सुबह ही इस बात की सूचना दे दी थी कि सरकार ने कोरोना महामारी के कारण निर्धारित समय से एक सप्ताह पहले ही सदन की कार्यवाही को स्थगित करने का फ़ैसला लिया है.
लेकिन बुधवार को स्थगन से पहले भी विपक्षी दल के सांसदों की ग़ैर-मौजूदगी में राज्यसभा में श्रम सुधार से जुड़े तीन विधेयक ध्वनिमत से पास कर दिए गए.
दस दिनों तक चले इस सत्र में राज्यसभा में 25 विधेयक पारित किए गए. सभापति वेंकैया नायडू ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, "सदन के लिए 18 बैठकें निर्धारित की गई थीं लेकिन 10 ही हो सकी और इस दौरान 25 विधेयक पारित किए गए."
श्रमिकों और मज़दूरों से जुड़े विधेयक को सदन के पटल पर रखते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "जब देश के 50 करोड़ मज़दूरों के हित के लिए विधेयक लाया जा रहा है तब विपक्ष सदन से अनुपस्थित है क्योंकि वे जनता से दूर हैं. आज़ादी के 73 सालों बाद श्रमिकों को अधिकार मिल रहा है जिसके लिए वे लंबे समय से इंतज़ार कर रहे थे. इन विधेयकों में उनकी तनख्वाह, सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा निहित है."
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