होम उमर अब्दुल्लाह पर मोदी सरकार को लेकर लोग शक क्यों कर रहे?
उमर अब्दुल्लाह पर मोदी सरकार को लेकर लोग शक क्यों कर रहे?
"अरे भाई! किस तरह की डील? मैं ज़्यादा से ज़्यादा ख़ुद को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाने की ही डील कर सकता हूँ. जब मैं आपकी असेंबली को ही नहीं मानता, चुनाव लड़ने के लिए ही तैयार नहीं हूँ, जिससे कि आप मुझे केंद्र शासित प्रदेश का मुख्यंमत्री बनाओगे, तो फिर मैंने क्या डील की आप लोगों के साथ.''
''मुझे उस केंद्र शासित प्रदेश की असेंबली में जाना ही नहीं है. मैं बस इतना ही कह सकता हूँ. मैं बस इतना ही कर सकता हूँ. मैं जनता को इतना कह सकता हूँ कि मैं इस केंद्र शासित प्रदेश में किसी राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनूँगा. आप हमारा स्टेटहुड वापस करें. पाँच अगस्त को आपने हमारा जो कुछ छीना है, हमें नीचा दिखाने के लिए, उसे वापस करें, उसके बाद ही यहाँ से आगे बढ़ने की बात हो सकती है."
अपनी रिहाई के बाद इंडियन एक्सप्रेस अख़बार को दिए पहले इंटरव्यू में नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्लाह ने ये बातें कहीं. इससे पहले उन्होंने इसी अख़बार में सोमवार को एक लंबा लेख लिखा था, जिसमें उन्होंने जब तक जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस नहीं मिल जाता, तब तक विधानसभा चुनाव ना लड़ने की बात कही थी.
इस साक्षात्कार के बाद से ही सोशल मीडिया पर इस बात की चर्चा शुरू हो गई थी कि उमर अब्दुल्लाह अनुच्छेद 370 पर ख़ामोश हैं और अब बस केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा वापस लिए जाने की माँग पर अड़े हैं.
क्या कहा उमर अब्दुल्लाह ने?
इंडियन एक्सप्रेस के अपने ताज़ा इंटरव्यू में उन्होंने ये भी कहा है कि अब 370 हटाने और दो नए केंद्र शासित बनाने के सरकार के फ़ैसले के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन नहीं करेंगे. वो इसके लिए आगे राजनीतिक और क़ानूनी लड़ाई लड़ेंगे. उमर के मुताबिक़ अब सड़क पर प्रदर्शन करने का वक़्त निकल चुका है.
इस इंटरव्यू में उन्होंने पहली बार विस्तार से बताया कि उन्हें कब और कैसे पाँच अगस्त को सूचित किया गया कि कश्मीर में क्या कुछ बदल गया है.
पाँच अगस्त 2019 को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने न केवल जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 और 35A को हटा दिया था, बल्कि जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा ख़त्म कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँट दिया था.
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