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हरों में फिर घटा रोजगार, मजदूरों के गांव लौट जाने से बढ़ी बेरोजगारी
कोरोनावायरस संकट (Coronavirus) के चलते शहरी बेरोजगारी में बढ़ोतरी हुई है. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई के पहले हफ्ते में शहरी बेरोजगारी तेजी से बढ़ी है. CMIE रिपोर्ट के मुताबिक, 5 जुलाई तक शहरों में बेरोजगारी बढ़कर 11.26 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो जुलाई के पहले हफ्ते में 10.69 प्रतिशत थी.
शहरी बेरोजगारी (Urban Unemployment) में यह बढ़ोतरी कर्नाटक, तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के कई शहरों में लॉकडाउन में प्रतिबंध लगाने के चलते बढ़ी है. पिछले हफ्ते शहरों में आंशिक या पूरी तरह से और हफ्ते के अंत में शहरी गतिविधियों पर नए प्रतिबंध लगाए गए.
मजदूरों के गांव लौट जाने से बढ़ी बेरोजगारी
अखिल भारतीय निर्माता संगठन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) महासंघ के पूर्व अध्यक्ष KE रघुनाथन (KE Raghunathan) ने कहा कि शहरी बेरोजगारी बढ़ने की मुख्य वजह इंडस्ट्रियल बेल्ट में पर्याप्त वर्कफोर्स (Workforce) की कमी है. चूंकि मजदूर अपने गांव वापस लौट आए हैं, जिससे इंडस्ट्रियल सेक्टर्स के वर्कफोर्स में काफी कमी आई है और उद्योगों के घाटे में वृद्धि हुई है. उन्होंने कहा कि अब शहरों में वापस जाने में मजदूरों को कम से कम 6 महीने लगेंगे और स्थिति धीरे-धीरे सुधरेगी.
बेरोजगारी से अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा गहरा असर
वहीं, श्रमिक अर्थशास्त्री और XLRI जमशेदपुर में केआर श्यामसुंदर (KR Shyam sunder) ने कहा कि कई क्षेत्रों में लोगों की आय में कमी और नौकरी के नुकसान ने बहुत सारे दर्द पैदा किए हैं. श्यामसुंदर ने कहा कि आय में आई गिरावट ने वेतनभोगी कर्मचारियों (Salaried Employees) को संघर्ष करने के लिए छोड़ दिया है, जिसका अर्थव्यवस्था पर अल्पकालिक और दीर्घकालिक, दोनों तरह से असर पड़ेगा.
नौकरियों और आय में आई भारी कमी
पिछले हफ्ते प्रकाशित नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूर और छोटे कारोबारियों पर पड़ा है. उदाहरण के लिए दिल्ली (Delhi) के करीब 85 प्रतिशत परिवारों ने सर्वे में बताया कि पहले की तुलना में लॉकडाउन के दौरान इनकम में कमी आई है.
CMIE ने अपनी वेबसाइट पर जानकारी देते हुए लिखा कि अप्रैल महीने में 17.7 मिलियन नौकरियां चली गईं और मई महीने में यह नुकसान बढ़कर 17.8 मिलियन हो गया. जून महीने में 3.9 मिलियन वेतनभोगी नौकरियों में कमी आई जो नौकरियों में सबसे कम वृद्धि है. CMIE के आंकड़ों से पता चलता है कि लगातार दूसरे हफ्ते तक ग्रामीण और समग्र रोजगारहीनता (Overall Joblessness) दर मामूली रूप से बढ़ी है.
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