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भारत चीन सीमा विवाद: क्या टूट जाएगा भारत का 5G का सपना?
भारत सरकार ने भले ही 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया हो. भले ही भले ही चीनी कंपनियों की हाई-वे प्रोजेक्ट्स में एंट्री पर रोक लगई गई है. लेकिन 5जी नेटवर्क को तकनीक मुहैया कराने वाली चीनी आईटी कंपनी ख़्वावे भारत की महत्वकांक्षी 5जी परियोजना में एक प्रमुख दावेदार है.
जिन ऑपरेटरों के भाग लेने की बात हुई थी, उनमें ख़्वावे भी शामिल था. अब अगर भारत अपने इस फ़ैसले से मुकरता है, तो इसे निश्चित तौर पर भारत और चीन के बीच पैदा हुए तनाव के परिणाम के तौर पर देखा जाएगा.
दूसरी ओर अमरीका ने इस कंपनी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बताया है. इसके अलावा एक अन्य कंपनी जेडटीई को भी ख़्वावे के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा माना गया है.
अमरीका के फ़ेडरल कम्युनिकेशंस कमिशन (एफसीसी) ने 30 जून को ख़्वावे टेक्नॉलॉजिज कंपनी और जेडटीई कॉरपोरेशन को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बताते हुए बयान जारी किया है. बयान के मुताबिक़ अमरीकी कम्युनिकेशन नेटवर्क को सुरक्षा संबंधी जोखिमों से बचाने के लिए यह क़दम उठाया गया है. इस क़दम के बाद अब अमरीकी दूरसंचार कंपनियाँ एफ़सीसी के 8.3 बिलियन डॉलर फंड का इस्तेमाल इन चीनी कंपनियों से ख़रीदारी करने में नहीं कर पाएँगी.
अभी हाल में ही अमरीकी रक्षा मंत्रालय ने यह दावा किया था कि ख़्वावे समेत 20 चीनी कंपनियाँ या तो चीनी फ़ौज समर्थित हैं या फिर उनका नियंत्रण चीनी फ़ौज के हाथ में है. हालाँकि ख़्वावे ने इन आरोपों को निराधार बताया था.
कंपनी के हालिया आँकड़ों के मुताबिक़ अब तक दुनिया भर के 91 देशों में ख़्वावे को 5जी का कॉन्ट्रैक्ट मिल चुका है और हाल ही में कंपनी को ब्रिटेन में एक बिलियन पाउंड की लागत से बनने वाले एक रिसर्च सेंटर को शुरू करने की अनुमति मिली है.
हालाँकि सिंगापुर में ख़्वावे 5जी की दौड़ से हाल ही में बाहर हुआ है और वहाँ नोकिया और एरिक्सन को नीलामी के बाद इस सेवा के लिए चुना गया है. ऑस्ट्रेलिया ने पहले से ही ख़्वावे पर प्रतिबंध लगाया हुआ है.
अमरीका और चीन के बीच लंबे समय से व्यापारिक गतिरोध बना हुआ है, जो कोरोना संक्रमण की शुरुआत होने के साथ ही और बदतर स्थिति में पहुँच चुका है. अमरीका के इस फ़ैसले से दोनों देशों के बीच पैदा हुई तल्ख़ी में एक नई कड़ी जुड़ गई है.
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