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महाराष्ट्र सरकार में सबकुछ ठीक नहीं? शिवसेना ने कांग्रेस से पूछा- क्यों चरमरा रही खटिया
शिवसेना के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र के विकास आघाडी सरकार में तनाव साफ दिख रहे हैं। तीन पार्टियों की गठबंधन वाली सरकार भले ही आंकड़ों के लिहाज से मजबूत नजर आ रही हो परंतु दलों के बीच खींचतान लगातार जारी है। सबसे ज्यादा तकरार कांग्रेस और शिवसेना के बीच दिखाई दे रही है। शरद पवार अपने अनुभव का लाभ उठाकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साथ तालमेल बिठा पाने में कामयाब हो रहे है। लेकिन कांग्रेस यह आरोप लगा रही है कि सरकार में होने के बावजूद वह हाशिए पर है। इसी कारण कांग्रेस प्रमुख निर्णय लेने की प्रक्रिया और महत्वपूर्ण बैठकों में खुद को शामिल कराने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से शिवसेना और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है लेकिन शिवसेना और कांग्रेस के बीच की तकरार कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। कांग्रेस खुले मंच पर भी महाराष्ट्र में स्वीकार करती रही है कि हम वहां पर निर्णय लेने की भूमिका में नहीं है। इतना ही नहीं कांग्रेस यह भी कहती है कि कोरोना काल हो या फिर निसर्ग तूफान, हर वक्त उद्धव ठाकरे और शरद पवार के बीच ही किसी निर्णय को लेकर बैठक होती हैकांग्रेस भी यह मानती है कि महाराष्ट्र में सत्ताधारी महा विकास आघाडी में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। पिछले दिनों महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक चव्हाण ने कहा कि हां, कुछ दिक्कतें हैं। हम इसे मुख्यमंत्री के साथ साझा करेंगे। हम मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश कर रहे है और तब हम उनके साथ सारी दिक्कतों पर विस्तार से बात करेंगे। हम अगले 2 दिन में उनसे मुलाकात होने की उम्मीद कर रहे है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मंत्री बालासाहेब थोराट भी कुछ ऐसा ही कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे कुछ मुद्दे हैं जिनका समाधान बातचीत से निकाला जाना चाहिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हम चाहते है कि फैसला लेने वाली प्रक्रिया में कांग्रेस को भी उसका हक मिलना चाहिए। महाराष्ट्र में नाराजगी का कारण विधान परिषद में खाली हो रही 12 सीटें भी हैं। वर्तमान में 12 सीटों में से शिवसेना को पांच, एनसीपी को 4 और 3 सीट कांग्रेस को दिए जाने का प्रस्ताव है। लेकिन कांग्रेस अपनी दावेदारी बराबरी की चाहती है। कांग्रेस ने ठाकरे से जल्द से जल्द तीनों सत्तारूढ़ दलों की एक बैठक करने की अपील की है ताकि राज्य विधान परिषद में नामांकन के लिए 12 सदस्यों के नाम तय किए जा सकें।
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