होम नक्सल मोर्चे पर उतरने की तैयारी कर रहे छत्तीसगढ़ में जन्मे बेल्जियम शेफर्ड
नक्सल मोर्चे पर उतरने की तैयारी कर रहे छत्तीसगढ़ में जन्मे बेल्जियम शेफर्ड
छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स (सीएएफ) की सातवीं वाहिनी में पहली बार बेल्जियम शेफर्ड नस्ल के खोजी कुत्तों की ब्रीडिंग कराई गई है। तीन फीमेल डॉग्स ने 22 बच्चों को जन्म दिया था। ये अब छह महीने से ज्यादा उम्र के हो गए हैं। उन्हें खासकर नक्सल क्षेत्र में अपराधियों का सुराग तलाशने के लिए तैयार किया जा रहा है। अब तक यहां पर मैदानी इलाके में ही बारूद, इंसान और लाश को सूंघकर खोजने की ट्रेनिंग दी जाती रही है। पहली बार इन्हें तैरने और पानी में रहकर भी अपने काम को अंजाम देने की कला सिखाई जा रही है।
परीक्षा में पास खोजी कुत्तों को नक्सलियों और अपराधियों का सुराग तलाशने की ट्रेनिंग दी जा रही है
बता दें कि नवंबर से दिसंबर के बीच इन पिल्लो का जन्म हुआ था। इनमें नौ मेल और 13 फीमेल हैं। इसके अलावा विभिन्न संगठनों ने लेब्राडोर और रॉटविलर नस्ल के दो श्वान डोनेट किए थे। सभी को तीन महीने तक ग्रूमिंग की ट्रेनिंग दी गई। जिसमें दिनचर्या से जुड़े नौ सबक सिखाए गए। इसके बाद इनकी कार्यक्षमता की परीक्षा हुई। जिसमें ये सभी पास हुए। अब इन्हें मैदानी इलाकों के अलावा नक्सल मोर्चे पर तैनात रहकर नक्सलियों और अपराधियों का सुराग तलाशने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
बेल्जियम शेफर्ड नस्ल के खोजी कुत्तों ने ही लादेन और बगदादी का सुराग खोजा था
यहां उल्लेखनीय है कि बेल्जियम शेफर्ड नस्ल के खोजी कुत्तों ने ही कुख्यात आतंकी लादेन और बगदादी का सुराग खोजने में अहम भूमिका निभाई थी।
इसकी ट्रेनिंग ले रहे
बटालियन के ट्रेनिंग सेंटर में सभी पिल्लो को स्नीफिंग और ट्रैकिंग के अलावा स्वीमिंग की भी ट्रेनिंग दी जा रही है। स्नीफिंग में इन्हें बारूद, इंसान या शव की गंध पहचानने के बारे में सिखाया ज रहा है। वहीं ट्रैकिंग में इन्हें किसी व्यक्ति का पीछा करने के बारे में बताया जा रहा है। बटालियन में पहली बार इन्हें स्वीमिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके लिए यहां पर एक स्वीमिंग पूल भी बनाया गया है।
डॉग्स की ट्रेनिंग के लिए 25 हैंडलर की पोस्टिंग
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