होम एमपी में रोचक मुकाबला, कांग्रेस एक्टिव मोड पर, पार्टी की नजर दूसरी सीट पर
एमपी में रोचक मुकाबला, कांग्रेस एक्टिव मोड पर, पार्टी की नजर दूसरी सीट पर
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के मतदान के पहले कांग्रेस ने सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है. कांग्रेस राज्यसभा चुनाव में दूसरी सीट पर भी जीत दर्ज कराना चाहती है.
इसके लिए उसकी नजर शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार पर टिकी हुई है. कांग्रेस को लगता है कि मंत्री ना बन पाने वाले नाराज विधायकों से वह समर्थन हासिल कर सकती हैं. इसके साथ कमलनाथ सरकारक के जमाने में उसे समर्थन देने वाले निर्दलियों और छोटे दलों के विधायकों को भी मौका देखकर साथ लाया जा सकता है.
इस समय मध्य प्रदेश विधानसभा जो सदस्य संख्या है उसके अनुसार कांग्रेस अपने बलबूते पर सिर्फ एक सीट जीत सकती है. अगर उसे दूसरी सीट पर जीत चाहिए तो उसे कम से कम 12 और विधायकों का समर्थन चाहिए. वह यह समर्थन भाजपा के नाराज विधायकों, निर्दलियों और छोटे दलों के विधायकों से समर्थन पाने की रणनीति पर काम कर रही है.
राज्यसभा चुनाव के मतदान के पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के साथ कुछ नेताओं और पूर्व मंत्रियों की एक बैठक बीती रात को कमलनाथ के निवास पर हुई. इस बैठक में यह रणनीति तय की गई कि कांग्रेस पूर्व में जिस तरह दो सीटों पर जीत दर्ज कराने की रणनीति पर चुनाव लड़ रही थी, ठीक उसी तरह हमें अब भी काम करना है.
सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों को हमारे पाले में रखना है. कांग्रेस फिलहाल शिवराज मंत्रिमंडल पर नजरें टिकाए हुए है. कांगे्रस को इस बात की उम्मीद है कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भाजपा में उन विधायकों में नाराजगी फैलेगी जो मंत्री नहीं बन पाएंगे. ऐसे नाराज भाजपा विधायकों को कांग्रेस अपने पाले में लाने की रणनीति बना रही है. उसे लगता है कि अगर भाजपा के आधा दर्जन से ज्यादा नाराज विधायकों का कांग्रेस को साथ मिल जाए तो वह निर्दलियों, सपा और बसपा के विधायकों को अपने पक्ष में ला कर दूसरी सीट पर कब्जा कर सकती है.
गौरतलब है कि वर्तमान में राज्य विधानसभा कांग्रेस के 92 विधायक है और भाजपा के 107. इसके अलावा सपा के 1, बसपा के 2 और निर्दलीय 4 विधायक हैं. इस सदस्य संख्या के आधार पर राज्य सभा के एक प्रत्याशी को जीतने के लिए 52 मत चाहिए.
इस आंकड़े के आधार पर भाजपा के पास अपने दोनों प्रत्याशियों को जिताने के लिए पर्याप्त विधायक है. जबकि कांग्रेस अपने दम पर सिर्फ एक सीट पर जीत सकती है. उसे अगर दूसरी सीट पर भी जीत चाहिए है तो उसे कम से कम 12 गैर कांग्रेसी विधायकों से समर्थन जुटाना होगा. इन 12 लोगों की व्यवस्था कांग्रेस भाजपा के असंतुष्टों के साथ साथ निर्दलियों और छोटे दलों के विधायकों में तलाश रही हैं.
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