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ब्रिटिश हाईकोर्ट ने खारिज की विजय माल्या के सुप्रीम कोर्ट जाने की अर्जी,
भारतीय शराब कारोबारी विजय माल्या को बृहस्पतिवार (14 मई) को उस समय बड़ा झटका लगा जब ब्रिटेन की सर्वोच्च अदालत में प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील की अनुमति मांगने वाला माल्या का आवेदन अस्वीकृत हो गया। अब प्रत्यर्पण की प्रक्रिया 28 दिन के अंदर पूरी करनी होगी। माल्या की बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइन्स के कर्ज से संबंधित धोखाधड़ी और धनशोधन के मामले में भारत प्रत्यर्पण के आदेश के खिलाफ उसकी अपील हाई कोर्ट में पिछले महीने ही खारिज हो गई थी।
माल्या (64 वर्षीय) के पास हाई कोर्ट के फैसले के बाद से इससे भी ऊंची अदालत में जाने की अनुमति मांगने का ताजा आवेदन दाखिल करने के लिए 20 अप्रैल से लेकर 14 दिन का समय था। हाई कोर्ट ने ब्रिटेन के गृह मंत्री द्वारा प्रमाणित वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत के प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ माल्या की अपील खारिज कर दी थी। ताजा फैसले को 'प्रनाउन्समेंट' (घोषणा) कहा गया है यानी भारत-ब्रिटेन प्रत्यर्पण संधि के तहत ब्रिटेन का गृह कार्यालय अब माल्या को भारत प्रत्यर्पित किए जाने के अदालत के आदेश को 28 दिन के भीतर औपचारिक रूप से प्रमाणित कर सकता है।
लंदन की रॉयल कोर्ट्स ऑफ जस्टिस में लॉर्ड जस्टिस स्टीफन इरविन और जस्टिस एलिजाबेथ लाइंग की दो सदस्यीय पीठ ने फैसले में कहा, ''अदालत ने सुप्रीम कोर्ट में अपील के मद्देनजर आम सार्वजनिक महत्व के विधि के प्रश्न को प्रमाणित नहीं करने के अपने इरादे को प्रकट कर दिया है।" अदालत ने ब्रिटेन के प्रत्यर्पण कानून 2003 की धारा 36 और धारा 118 के तहत 28 दिन की 'जरूरी अवधि तय की है जिसके भीतर प्रत्यर्पण प्रक्रिया होनी चाहिए।
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