होम मई में पूरे होंगे जांच के पर्याप्त इंतजाम, जून-जुलाई में बढ़ेंगे कोरोना वायरस के मामले!
मई में पूरे होंगे जांच के पर्याप्त इंतजाम, जून-जुलाई में बढ़ेंगे कोरोना वायरस के मामले!
केंद्र सरकार का कोविड-19 संक्रमण से निबटने का पहला चरण पटरी से उतर चुका है? आईसीएमआर के सलाहकारों में शामिल आईआईटी दिल्ली के सूत्र कुछ इसी तरह का इशारा कर रहे हैं।
बताते हैं कि सरकार ने पहले चरण के लॉकडाउन के बाद 15 अप्रैल से कोविड-19 की जांच, इलाज की रणनीति बनाई थी, लेकिन हड़बड़ी में लिए गए निर्णय ने मंसूबों पर पानी फेर दिया। मौजूदा समय में देश के पास न तो कोविड-19 संक्रमण की जांच के पर्याप्त उपाय हैं, न ही साधन। बताते हैं मई के आखिरी सप्ताह तक ही अब इस तरह की क्षमता आ पाने के आसार हैं।
चीन की रैपिड टेस्ट किट का सही नहीं था आइडिया
सूत्र बताते हैं कि भारत सरकार, आईसीएमआर दोनों ने महामारी के दबाव और हड़बड़ी में रैपिड टेस्ट किट से जांच का निर्णय ले लिया था। इसके लिए चीन समेत कुछ देशों से बड़े पैमाने पर रैपिड टेस्ट किट लेने की पहल हुई थी, जबकि आईसीएमआर के वैज्ञानिक जानते थे कि इस तरह की रैपिड टेस्ट किट के नतीजे विश्वसनीय नहीं होते।
वायरस की जांच में सबसे कारगर उपाय आरटी-पीसीआर तकनीक पर आधारित मेसेंजर आरएनए (राइबो न्यूक्लिक एसिड) की जांच है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसी की मान्यता दी है। सूत्र का कहना है कि आरटी-पीसीआर तकनीक से जांच का ही नतीजा 100 फीसदी विश्वसनीय होता है। बताते हैं कि रैपिड टेस्ट किट के जांच की शुद्धता 10 फीसदी के ही करीब आ पाई। इसलिए आईसीएमआर को इस तकनीक से जांच का निर्णय वापस लेना पड़ा।
मई के आखिरी सप्ताह में आएगी जांच में तेजी
केंद्र सरकार के रणनीतिकारों में प्रमुख डा. विनोद कुमार पॉल ने भी 15 अप्रैल के बाद देश का नक्शा बदलने की बात कही थी, लेकिन अब उनका भी लड़ाई लंबी चलने का अनुमान है। एम्स के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया ने जून में कोविड-19 के मामले शीर्ष होने पर आशंका व्यक्त की है।
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