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दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर सील होने से फंसे हजारों कर्मचारी
कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए दिल्ली और हरियाणा के बीच गुरुग्राम, सोनीपत और फरीदाबाद बॉर्डर को सील कर दिया गया। जिसकी वजह से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, इस मामले में दिल्ली सरकार हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों से बात कर रही है।
दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर सील होने की वजह से हजारों की संख्या में कर्मचारियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि बहुत से कर्मचारी हरियाणा से दिल्ली तक का रोजाना सफर करते हैं।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक नगर निगम अपने 20 फीसदी फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को गंवा सकती है। हालांकि वह अपने विभागों को कर्मचारियों के लिए अस्थायी व्यवस्था करने के लिए प्रेरित कर रही है।
दक्षिण नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि कृष्णा मार्केट, लाजपत नगर, ककरोला और ग्रीन पार्क के सामुदायिक केंद्रों में रहने की व्यवस्था की गई थी। साथ ही उन्होंने बताया कि एसडीएमसी (SDMC) यहां फंसे कर्मचारियों को होटलों में भी रहने की अनुमति प्रदान करेगी।
हरियाणा सरकार में गृह मंत्री अनिल विज ने कहा था कि सीमाएं पूरी तरह से सील रहेंगी। न किसी को आने दिया जाएगा और न ही जाने दिया जाएगा। इस मामले में हरियाणा सरकार ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कहा था कि वह अपने कर्मचारियों को दिल्ली में ही रखें और अगर जरूरत हो तो हम कर्मचारियों के ठहरने के लिए हरियाणा भवन भी देने को तैयार हैं।
अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी ने दावा किया कि हरियाणा ने सिर्फ केंद्रीय पास को ही मंजूरी दी है। जबकि केंद्र ने इस तरह का कोई भी पास जारी नहीं किया है। केंद्रीय आदेश में कहा गया है कि कोविड-19 रोकथाम उपायों में लगे स्वच्छता कर्मियों और आवश्यक सेवा कर्मचारियों को उनकी आईडी के आधार पर अनुमति दी जानी चाहिए। एक अधिकारी ने बताया कि फील्ड में काम करने वाले कर्मचारी अपने परिवारों से दूर नहीं रहना चाहते हैं। सीमाएं बंद होने की वजह से कर्मचारी काम पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। एसडीएमसी के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि 250 कर्मचारी बुधवार को अनुपस्थित थे। दिल्ली परिवहन निगम, दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली पुलिस भी हरियाणा के कर्मचारियों पर काफी निर्भर रहते हैं। बता दें कि एनसीआर इलाके से दिल्ली पुलिस को करीब 30 फीसदी कार्यबल मिलता है और 1,000 कर्मचारियों के रुकने के लिए 60 आवास की व्यवस्था की गई है।
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