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सावधान! इंसान ही नहीं बल्कि समुद्र में भी फैल चुकी है ये महामारी
धरती के ऊपर कोरोना वायरस की तरह ही समुद्र में भी महामारी फैल चुकी है। समुद्र और उसके वातावरण पर अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों की माने तो 50 साल में पहली बार समुद्र के अंदर इतनी बड़ी महामारी देखने को मिली है। समुद्री जीवों का अध्ययन करने वाले एक वैज्ञानिक ने तो इसकी तुलना इबोला से कर डाली है।इस बीमारी की चपेट में जो जीव है जो समुद्र के अंदर के जीवन चक्र का आधार माना जाता है। इस जीव का नाम है कोरल रीफ। जिस बीमारी की जकड़ में कोरल रीफ आए हैं- उसका नाम है स्टोनी कोरल टिश्यू लॉस डिजीस।
अमेरिका के वर्जिन आइलैंड्स के सेंट थॉमस तट के नीचे मौजूद कोरल रीफ SCTLD बीमारी से सबसे ज्यादा ग्रसित हैं। यह बीमारी बेहद तेजी से फैल रही है। वैज्ञानिक इसके फैलने की गति से परेशान हैं। इसकी वजह से करीब 22 प्रजातियों के कोरल रीफ चपेट में आ गए हैं। ऐसा मंजर 50 साल पहले देखने को मिला था।
1970 के दशक में व्हाइट बैंड बीमारी की वजह से समुद्र के अंदर मौजूद कोरल रीफ की दो प्रजातियां खत्म हो गई थी। लेकिन इस बार SCTLD ने कोरल रीफ की 22 प्रजातियों को अपनी चपेट में ले रखा है। सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि वैज्ञानिकों के पास इस बीमारी को रोकने का कोई तरीका नहीं है।
2014 में वर्जिन आइलैंड्स पर कुछ गोताखोरों ने कोरल रीफ में ये बीमारी देखी। उसके बाद से ये बीमारी अमेरिका के मायामी से फ्लोरिडा तक के तटों के नीचे मौजूद कोरल रीफ को चपेट में लेता चला गया। 2017 तक अमेरिका के मायामी से ऊत्तर करीब 150 किलोमीटर और दक्षिण में 250 किलोमीटर दूर स्थित की-वेस्ट द्वीप तक फैल गई यह बीमारी।
SCTLD बीमारी का शुरुआती लक्षण ये है कि कोरल रीफ के ऊपर सफेद रंग के धब्बे दिखने लगते हैं। धीमे-धीमे ये पूरे कोरल रीफ पर फैल जाते हैं। इसके बाद कोरल रीफ का रंग बदलने लगता है और उसके जीवन का अंत होने लगता है।
फ्लोरिडा के तटों के नीचे मौजूद आधे कोरल रीफ और कैरेबियन सागर में मौजूद करीब एक तिहाई कोरल रीफ स्टोनी कोरल टिश्यू डिजीस यानी SCTLD की चपेट में आ चुके हैं। इसकी वजह से करीब 400 किलोमीटर की दूरी में फैले अमेरिकी तटों के नीचे कोरल रीफ खतरे में हैं।
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