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प्रदीप द्विवेदी: एमपी के घटनाक्रम से सबक लेगी अशोक गहलोत सरकार?
सुप्रीम कोर्ट ने एमपी के सियासी घटनाक्रम के मद्देनजर आदेश दिए थे कि शुक्रवार को विधानसभा में बहुमत परीक्षण किया जाए, लेकिन एमपी में कांग्रेस सरकार के पास बहुमत नहीं है, लिहाजा फ्लोर टेस्ट से पहले ही सीएम कमलनाथ ने प्रेस कांफ्रेंस करके इस्तीफे का ऐलान कर दिया.
कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस के बीच सियासी रस्साकशी का फायदा बीजेपी को हुआ, तो एमपी में तीन प्रमुख नेताओं- कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच राजनीतिक असंतुलन ने कांग्रेस सरकार को विदा कर दिया है.
राजस्थान में कर्नाटक और एमपी जैसे सियासी हालात तो फिलहाल नहीं हैं, क्योंकि सीएम अशोक गहलोत ने जहां बीएसपी विधायकों को अपने साथ लाने में कामयाबी हांसिल की है, वहीं निर्दलीय विधायकों को भी वे सरकार के समर्थन में लाने में सफल रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के अंदर सियासी असंतुलन आने वाले समय में बड़ा सवाल बन सकता है.
जहां उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके समर्थकों का सीएम गहलोत को लेकर जो नजरिया है, वह तो जगजाहिर है ही, वहीं कुछ वरिष्ठ नेता, जिन्हें मंत्री नहीं बनाया गया है, उनकी नाराजगी भी समय आने पर भारी पड़ सकती है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि समय रहते यदि राजस्थान सरकार में सियासी संतुलन कायम नहीं किया गया, तो राजस्थान में भी बीजेपी की सियासी जोड़तोड़ की राह आसान हो सकती है!
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