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जम्मू-कश्मीर में केन्द्रीय कानूनों के क्रियान्वयन में कोई भेदभाव नहीं: गृहमंत्री शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में अल्ताफ बुखारी के नेतृत्व में जम्मू एवं कश्मीर की अपनी पार्टी के 24 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार जम्मू एवं कश्मीर के सर्वांगीण विकास के लिए सभी कदम उठाएगी. उन्होंने विश्वास जताया कि अगले कुछ महीनों में जमीनी स्तर पर सुस्पष्ट बदलाव दृष्टिगोचर होने लगेगा. शाह ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा लगभग 40 मुद्दे उठाए जाने के बाद उनसे बातचीत करते हुए जोर देकर कहा कि सरकार का क्षेत्र में जनसांख्यिकीय परिवर्तन लाने का कोई इरादा नहीं है और ऐसी किसी भी बातचीत का बिल्कुल कोई आधार नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार जम्मू एवं कश्मीर के राज्य बनने की उम्मीदों को पूरी करने के लिए जल्द से जल्द समाज के सभी वर्गों के साथ कार्य करेगी. प्रधानमंत्री ने धारा 370 निरस्त किए जाने के बाद राष्ट्र को संबोधित करते हुए यह बात कही थी और यहां तक कि उन्होंने भी 6 अगस्त, 2019 को लोकसभा के अपने भाषण में यही बात कही.
गृहमंत्री ने कहा कि यह भारत के हितों के लिए भी अच्छा है, क्योंकि यह क्षेत्र एक सीमावर्ती क्षेत्र है. शाह ने कहा कि रियायतों पर सभी निर्णय जमीनी वास्तविकताओं पर आधारित हैं और किसी दबाव के कारण नहीं है. उन्होंने निवारक नजरबंदी से लोगों को रिहा किए जाने, इंटरनेट की बहाली करने, कर्फ्यू में ढील देने जैसे कदमों का उल्लेख किया और कहा कि यहां तक कि राजनीतिक कैदी भी आने वाले समय में रिहा कर दिए जाएंगे, क्योंकि सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु नहीं होनी चाहिए, चाहे वह आम कश्मीरी हो या सुरक्षा कर्मचारी. गृह मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में जम्मू एवं कश्मीर की एक बेहतर अधिवास नीति होगी और कहा कि व्यापक सलाह-मशविरों के बाद शीघ्र ही एक विवेकसम्मत आर्थिक विकास नीति का प्रारुप तैयार किया जाएगा.
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