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दिल्ली के नतीजे- बिरयानी की कहानी और गोली मारने के नारे BJP के कितना काम आए?
शाहीन बाग़ के लोग घर में घुसकर आपकी बहू बेटियों के साथ बलात्कार करेंगे."
"आतंकवादियों को बिरयानी खिलाने के बजाय बुलेट (बंदूक़ की गोली) खिलानी चाहिए."
"देश के ग़द्दारों को "गोली मारो सा*** को."
"अरविंद केजरीवाल आतंकवादी है."
ये मामूली वाक्य नहीं हैं बल्कि दिल्ली चुनाव में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की पुरज़ोर कोशिश की कुछ मिसालें हैं. वैसे तो देश श्मशान-क़ब्रिस्तान जैसे चुनाव प्रचार यूपी में देख चुका है लेकिन दिल्ली के चुनाव को ध्रुवीकरण की कोशिश के लिए यादगार चुनावों में गिना जाएगा.
भड़काऊ नारों का आलम ये रहा है कि पार्टी के स्टार प्रचारकों को चुनाव आयोग ने कैम्पेन करने से रोक दिया.
क्या दिल्ली चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के पास दूसरे मुद्दों नहीं थे?
ये कहना भी ग़लत होगा. प्रधानमंत्री मोदी ने देश के विकास की बात दोहराई और केजरीवाल सरकार पर "केंद्र सरकार की अच्छी स्कीमों में रुकावट पैदा करने" का ज़िम्मेदार ठहराया. उन्होंने केजरीवाल के मोहल्ला क्लिनिक की काट के लिए बार-बार कहा कि दिल्ली सरकार ने आयुष्मान भारत स्कीम को लागू नहीं किया.
लेकिन मोटे तौर पर छोटी-छोटी सभाएं आयोजित करके प्रवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर जैसे नेता शाहीन बाग़, देशद्रोही, पाकिस्तान और आतंकवाद की बातें करते रहे.
अमित शाह और कई बड़े नेताओं ने भारत की सीमाओं को मज़बूत और देश को 'दुश्मनों की पहुँच से बाहर" बताया. उन्होंने बार-बार याद दिलाया कि भारत ने किस तरह पाकिस्तान की बुरी हालत कर दी है और अब वह डर से कांपता है.
बात रोज़गार, पीने के साफ़ पानी, बेहतर सड़कें और मूलभूत सुविधाओं में बुनियादी बदलाव लाने की भी हुई. बात और ज़्यादा विदेशी निवेश, ग़रीबों के लिए घर और उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के वायदे की भी हुई.
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