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बजट 2020: मोदी सरकार क्या आयकर में राहत दे पाएगी?
आंकड़ों से देश की आर्थिक हालत का अंदाज़ा होता है, देश की अर्थव्यवस्था 5 प्रतिशत की रफ़्तार से बढ़ रही है, जो बीते 11 साल में न्यूनतम है. निजी स्तर पर लोगों की ख़पत सात साल के अंतराल में अपने निचले पायदान पर है.
देश में निवेश की दर, बीते 17 सालों में सबसे कम है. मैन्यूफैक्चरिंग के सेक्टर में भी गिरावट है, यह बीते 15 साल के सबसे निचले दर पर पहुंच गई है. जबकि कृषि के क्षेत्र में बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन बीते चार सालों में सबसे धीमी रफ्तार में. इतना ही नहीं, आम लोगों के लिए सामानों के दाम बढ़ रहे हैं- महंगाई की दर रिजर्व बैंक के लक्ष्य से बढ़कर 7.35 प्रतिशत हो चुकी है.
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए क्या कर सकती है? विशेषज्ञ सर्वसम्मति से ये मान रहे हैं कि सरकार ख़र्च बढ़ाकर सुस्ती पर अंकुश लगा सकती है.
उदाहरण के लिए अगर सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाती है तो इससे लोगों को नौकरियां उपलब्ध होंगी, जिसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है. थिंक टैंक सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के मुताबिक़ 2019 के सितंबर से दिसंबर की तिमाही के दौरान देश में बेरोज़गारी की दर बढ़कर 7.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है.
लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने दूसरी चुनौतियां भी हैं.
अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए वे पहले कॉरपोरेट टैक्स दर में कटौती की घोषणा कर चुकी हैं. बावजूद इसके जीएसटी सहित कर राजस्व के संग्रह में गिरावट ही दिखी है, ऐसे में सरकार के पास ख़र्च बढ़ाने के लिए ज़्यादा पैसा नहीं है.
यही वजह है कि कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि सरकार आयकर में कटौती करने पर विचार कर सकती है.
सवाल यह भी है कि क्या कारगर होगा?
इमकाय वेल्थ मैनजमेंट के रिसर्च प्रमुख के जोसेफ थॉमस ने बीबीसी को बताया, "आम लोगों के कर में कटौती का मतलब है कि आम लोगों के हाथों में ज़्यादा पैसा बचेगा, जिसके चलते वे ज्यादा ख़र्च कर पाएंगे. ज़्यादा बचत कर पाएंगे और बचत को निवेश कर पाएंगे. ऐसे में आम लोगों के आयकर में राहत देना एक अच्छा क़दम हो सकता है."
"इसके अलावा, यह भी कहा जा रहा है कि कॉरपोरेट टैक्स में कटौती के बाद आम लोगों के आयकर में भी कटौती होनी चाहिए. यह आर्थिक सामाजिक दृष्टिकोण से भी ज़रूरी क़दम है. बड़ी और विकसित हो रही अर्थव्यवस्था में आर्थिक सुधार, खुदरा खपत और कॉरपोरेट पूंजी निवेश, दोनों उपायों से होता है. इसके लिए ज़रूरी है
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