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बजट 2020: इस बार एक दशक का सबसे चुनौतीपूर्ण होगा बजट
1 फरवरी को वित्तमंत्री निर्मला सीतरण बजट पेश करने जा रही है। भारत में आर्थिक मंदी और जीडीपी के गिरते आंकडों के बीच बजट एक मुश्किल दौर में पेश होने वाला है। देश की अर्थव्यवस्था चुनौतीपुर्ण दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में निर्मला सीतारमण द्वारा 2020 के आम बजट को लेकर क्या अपेक्षाएं हो सकती है।

देश में बेरोजगारी, कमजोर निवेश और जीडीपी ग्रोथ के 5 प्रतिशत से भी नीचे पहुंचने के बीच बजट को पेश करने को लेकर सीतारण के सामने बड़ी चुनौती है। एक दशक में भी ऐसे हालात नहीं बने हैं जो इस बार बजट पेश करने के दौरान पैदा हो रहे हैं। 17 सालों के निचले स्तर पर देशी की आर्थिक ग्रोथ आ ठहरी है। जीडीपी ग्रोथ भी 11 सालो के न्यूनतम स्तर पर है।

इस बार मांग बढ़ने को लेकर सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है। एक तरफ मुद्रास्फीति की दर और दूसरी तरफ कमजोर मांग भी परेशानी बनी हुई है। आमतौर पर मांग में बढ़ोतरी के लिए आरबीआई की तरफ से कटौती की जाती है लेकिन इस बार इसमें कटौती करना भारतीय रिजर्व बैंक के खाते से बाहर हो गया है। इसके पीछे माना जा रहा है कि महंगाई दर के पहले से ही 7.4 प्रतिशत के स्तर पर पर होने से आरबीआई के लिए ऐसा करना चुनौती से कम नहीं हैं।
सरकार को अपनी झोली भरने के लिए कॉर्पोरेट टैक्स में बढ़ोतरी का एक विकल्प बचा है लेकिन ऐसा करने से कारोबारी माहौल पर उल्टा असर देखने को मिल सकता है। पिछले बजट के दौरान भी कॉर्पोरेट टैक्स में इजाफे की घोषणा के बाद सरकार को अपने कदमों को वापस खींचना पड़ा था। बजट 2020 ऐसे हालात में भी आ रहा है जब पूरे देश में एनआरसी और नागरिकता कानून को लेकर विरोध चल रहा है। ऐसे में इस बार आने वाला बजट चुनौतियों से भरे समय में पेश किया जाएगा।
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