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समाचारदेश Alert Star Digital Team Jan 26, 2020 08:19 PM

जम्मू में कड़ी सुरक्षा के बीच गणतंत्र दिवस मनाया गया

जम्मू में कड़ी सुरक्षा के बीच गणतंत्र दिवस मनाया गया

जम्मू में कड़ी सुरक्षा के बीच गणतंत्र दिवस मनाया गया

जम्मू। जम्मू में रविवार को कड़ी सुरक्षा के बीच परंपरा और हर्षोल्लास के साथ 71वां गणतंत्र दिवस मनाया गया। मुख्य कार्यक्रम में उपराज्यपाल जी.सी.मुर्मू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। पिछले साल पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद यह पहला गणतंत्र दिवस है।

मुर्मू ने जम्मू के बीचोबीच लोगों से ठसाठस भरे मौलाना आजाद स्टेडियम में तिरंगा फहराया और परेड का निरीक्षण करने के साथ भव्य मार्च पास्ट की सलामी ली जिसका नेतृत्व जम्मू-कश्मीर लाइट इंफैंट्री जेएकेएलआई) की पांचवीं बटालियन के कर्नल राजेश कुमार शर्मा ने किया। जेएकेएलआई के अलावा सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, जम्मू-कश्मीर सशस्त्र पुलिस, भारतीय रिजर्व पुलिस, आपदा मोचन बल, जम्मू-कश्मीर अग्नि एवं आपदा सेवा, पूर्व सैनिक, राष्ट्रीय कैडट कोर और भारत स्काउट की टुकड़ियों ने भी मार्च पास्ट में हिस्सा लिया।

उपराज्यपाल ने कार्यक्रम को संबोधित किया। परेड के अलावा बालकों और बालिकाओं ने सांस्कृतिक और खेलकूद का कार्यक्रम पेश किया और स्थानीय पुलिस के दस्ते ने मोटरसाइकिल पर हैरतअंगेज करतब दिखाए। कार्यक्रम की शुरुआत में वायुसेना के हेलीकॉप्टर ने पुष्पवर्षा की जो आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा और पूरे कार्यक्रम के दौरान नियमित अंतराल पर तीन हेलीकॉप्टर ऊपर से गुजरे। जम्मू-कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्री, नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, उनके बेटे उमर अब्दुल्ला और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती अभी श्रीनगर में हिरासत में हैं इसलिए कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष रविंद्र रैना रहे।

कार्यक्रम के अंत में रैना ने पत्रकारों से कहा, '' जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए यह गणतंत्र दिवस ऐतिहासिक है क्योंकि हमारे शहीदों के 'एक निशान, एक विधान और प्रधान' का सपना सच हुआ है। केवल राष्ट्रीय ध्वज ही इस बार फहराया गया।'' उन्होंने कहा, '' अनुच्छेद-370 खत्म होने के साथ '' एक भारत श्रेष्ठ भारत''का सपना सच हुआ है। यह देश को विश्व शक्ति बनाने की शपथ लेने का दिन है।''

हालांकि, उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया जो पिछले साल पांच अगस्त से हिरासत में हैं। ध्वजारोहण के आधिकारिक कार्यक्रम में शामिल होने से पहले उपराज्यपाल बालिदान स्तंभ गए और देश सेवा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। बलिदान स्तंभ पर कार्यक्रम सेना ने गणतंत्र दिवस समारोह के तहत आयोजित किया।

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