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व्यष्टि से समष्टि की यात्रा, सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध बनने की यात्रा, काव्य शिक्षा का माध्यम बना डॉ सत्या होप टॉक
शिक्षा के अभियान को अपना विषय बनाए रखने वाले डॉ सत्यप्रकाश काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक ने पिछले 425 दिनों की अनवरत वर्चुअल मीट के द्वारा समाज में चिंतन प्रक्रिया को जागृत करने में सफलता पाई है. उनके आह्वान पर जुड़े हुए साहित्य समाज के लोगों ने एक बहुत ही गंभीर विषय पर पिछले 10 दिनों से अनवरत चर्चा करके समाज को वर्तमान परिस्थितियों में बौद्ध ज्ञान के अनुपालन के लिए प्रेरणा दी. 21 से 30 मई तक चलने वाली इस वर्कशॉप में, साहित्य समागम में जुड़े लोगों ने, एक मनो वैज्ञानिक के रूप में समाज को वर्तमान महामारी की परिस्थिति में स्वस्थ चिंतन देने की कोशिश की है. वनस्पति विज्ञान के ज्ञाता और चिकित्सा विज्ञान संस्थान के हर्बल ड्रग डेवलपमेंट विभाग के अधिकारी, डॉक्टर सत्य प्रकाश ने स्वस्थ चिंतन प्रक्रिया के माध्यम से समाज को व्यक्तित्व विकास और स्ट्रेस मैनेजमेंट के लिए प्रेरणा दी है. पिछले 425 दिनों से अनवरत चल रहा यह कार्यक्रम पूरी तरह से महामना के सिद्धांतों पर केंद्रित है तथा वर्तमान मे 200 से अधिक पूरे भारतवर्ष से जुड़े, लेखकों और रचनाकारों के द्वारा संचालित हो रहा है. इस कार्यक्रम में जोड़े रखने के लिए एक नेतृत्वकर्ता के रूप में डॉक्टर सत्य प्रकाश लोगों को समय-समय पर निर्देशन भी देते रहते हैं और उनको विषय देकर समाज के लिए चिंतन प्रक्रिया स्थापित करते हैं. बौद्ध औऱ उनके जीवन से मिली शिक्षा के ऊपर हुई चर्चा, में पिछली खबर लिखे जाने के पश्चात वर्षा अवस्थी, डॉ विजय प्रसाद शुक्ला, संजय सागर जी, श्याम सुंदर तिवारी, डॉ इंदु झुनझुनवाला, निगार नाज, जरीन जी, रश्मि लता मिश्रा जी, परमानंद शर्मा जी, मयंक मणि दुबे, अविनाश भटकर मसरूर, पुष्पा मिश्रा, डॉ एसडी शर्मा, मधु प्रसाद जी, सूर्य नाथ योगी, उमा शर्मा जी, प्रमिला शर्मा जी, रेखा भदौरिया, डॉक्टर देवेंद्र तोमर जी, हरगोविंद ठाकुर जी, मानस मुकुल जी, मंजुला मोहंती जी, निधि बंसल जी, डॉ तरुणा माथुर जी, पुष्पा सैनी जी, नीलू सक्सेना जी, अंजनी अग्रवाल जी, संगीता श्रीवास्तव जी, ज्योत्सना सिंह जी,पारुल अग्रवाल जी, रेखा बोरा जी, ओम प्रकाश मिश्रा व्यथित जी, मंजूषा जी, निधि जैन जी, सवी शर्मा जी, रचना शास्त्री जी, क्षमा द्विवेदी जी ने अपना बहुमूल्य समर्थन दिया.
कल कार्यक्रम के समापन दिवस भी बहुत ही विशिष्ट लोगों का आगमन होने वाला है, जिनमे प्रोफेसर ओमपाल सिंह निडर, डॉक्टर अंगद धारिया जी, डॉक्टर इंदु झुनझुनवाला, रेखा बोरा, डॉक्टर सत्य प्रकाश जी के साथ जुड़कर सभी लोगों को सम्मानित करेंगे. अन्य लोगों में रामलाल सिंह, मनीषा शर्मा, परिणीता कौशिक, अर्चना गोयल, डॉ वीणा सिंह जी, कविता सक्सेना जी, डॉ ध्रुव तिवारी जी, राजस्थान से शकुंतला जी, डॉ कल्पना दीक्षित शिक्षा के इस अभियान को अपना समर्थन देकर इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय कार्यक्रम बनाने में अपनी भूमिका संकल्पित करेंगे.
शिक्षा का यह कार्यक्रम बच्चों के लिए भी और उनके अभिभावकों के लिए काम कर रहा है और उन सभी लोगों को सम्मानित किया जाता है, जो अपने पढ़ाई लिखाई से जुड़े हुए काम को सोशल मीडिया पर डालते हैं.
वैज्ञानिक का मानना है कि इस तरह से अच्छी चीजों को समाज में डालने से सोशल मीडिया का डिटॉक्सिफिकेशन होता है
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