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चीन से मुकाबला करने को भारत अपनी सेनाओं में कर रहा ऐतिहासिक सुधार: रिपोर्ट
नई दिल्ली. भारत में बहुप्रतीक्षित सैन्य सुधारों (Military Transformation) को केंद्र की मोदी सरकार के नेतृत्व में नई जिंदगी मिली है. साथ ही अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ संबंध बेहतर कर भारत खुद को रणनीतिक रूप से भी मजबूत कर कर रहा है. ब्लूमबर्ग पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई में आजादी के बाद सेनाओं के बीच समन्वय के लिए ऐतिहासिक सुधार किए जा रहे हैं. इसी क्रम में मोदी सरकार की तरफ से चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के तौर पर जनरल बिपिन सिंह रावत की नियुक्ति की गई है.
रिपोर्ट के मुताबिक बीते महीने डिपाटर्मेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स की तरफ से पाकिस्तानी सीमा की रक्षा करने वाली सेना की यूनिट को आदेश दिया है कि नेवी और एयरफोर्स के साथ बेहतर सहयोग का एक प्लान तैयार किया जाए. इस मॉडल को पूरे देश में लागू किया जाएगा. अधिकारियों के मुताबिक 2024 तक पूरी मिलिट्री एक जबरदस्त सहयोग वाले स्ट्रक्चर के अंतर्गत काम करेगी. सेनाओं के बीच तालमेल बेहतर बनाने की दिशा में ये कदम ऐतिहासिक होगा.
AUKUS पार्टनरशिप में पारस्परिकता पर जोर
एक ज्यादा ‘एकीकृत’ सेना के साथ किसी भी मुश्किल वक्त में सहयोगी देशों जैसे अमेरिका और उनके सहयोगी के साथ काम करना आसान होगा. AUKUS पार्टनरशिप में जिस बात पर बीते सप्ताह अमेरिका की तरफ से जोर दिया गया है, वो है पारस्परिकता. इस मामले में भारत में लंबे समय से सुधार नहीं हुए हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
ऑस्ट्रेलिया के नेशनल सिक्योरिटी कॉलेज में सीनियर रिसर्च फेलो डेविड ब्रेवस्टर ने अपनी किताब ‘इंडिया ऐज ऐन एशिया पेसिफिक पावर’ में लिखा है-क्वाड के सहयोगियों ने पाया है कि वो भारत की सिर्फ एक सेना के साथ ही युद्धाभ्यास कर सकते हैं. जैसे नेवी के साथ युद्धाभ्यास होगा तो उसमें एयरफोर्स नहीं होगी या फिर एयरफोर्स के साथ युद्धाभ्यास में नेवी की गैरमौजूदगी होती है.
रिपोर्ट में पीएम मोदी के ट्वीट का जिक्र
बृहस्पतिवार को पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन, जापानी प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा और अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से अलग-अलग मुलाकात की है. अपने ट्वीट में पीएम ने ‘साझा मूल्यों’ और ‘बढ़ते सहयोग’ का जिक्र किया है.
इसके अलावा बीते सालों में भारत ने सेनाओं के लिए हथियारों की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाई है. साथ ही आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी प्रोडक्शन को बढ़ावा दिया जा रहा है.
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