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समाचारराजनीतिप्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Apr 1, 2026 07:51 PM

अखिलेश-आंबेडकर मुलाकात पर गरमाई यूपी की सियासत, बसपा बोली: कोई दांव काम नहीं आएगा

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के प्रपौत्र डॉ. राज रतन अंबेडकर से हुई मुलाकात के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

अखिलेश-आंबेडकर मुलाकात पर गरमाई यूपी की सियासत, बसपा बोली: कोई दांव काम नहीं आएगा

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के प्रपौत्र डॉ. राज रतन अंबेडकर से हुई मुलाकात के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस मुलाकात को लेकर अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। बसपा की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने साफ कहा कि इस मुलाकात से पार्टी पर कोई राजनीतिक असर नहीं पड़ेगा।

बसपा ने कहा— इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा

लखीमपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विश्वनाथ पाल ने कहा, 'क्या यह जरूरी है कि हमारे खानदान का व्यक्ति हमारी विचारधारा को लेकर चले. कोई दांव चलने वाला नहीं है. बहुजन समाज पार्टी का निशान बाबा कांशीराम ने दिया है, उन्होंने बहन मायावती को अपना उत्तराधिकारी बनाया है.'

उन्होंने स्पष्ट किया कि बसपा अपनी विचारधारा और संगठनात्मक ताकत के आधार पर आगे बढ़ रही है और किसी राजनीतिक मुलाकात से पार्टी की स्थिति प्रभावित नहीं होगी।

“सपा ने बहुजनों का नुकसान किया”

बसपा नेता ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियों में जुटी है। उन्होंने कहा, 'हम अपने कार्यकर्ताओं के इकट्ठा कर 2027 में बहन मायावती को मुख्यमंत्री बनाने का काम करने जा रहे है. सपा में बहुजन समाज के लोगों का बड़ा नुकसान किया है. यह कैसे विचारधारा को आगे बढ़ाएंगे.'

सियासी मायने तलाश रही पार्टियां

डॉ. राज रतन अंबेडकर और अखिलेश यादव की मुलाकात के बाद राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, इस मुलाकात को समाजवादी पार्टी की ओर से उत्तर प्रदेश में बसपा के पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

सपा कार्यक्रम में क्या बोले डॉ. राजरतन अंबेडकर

कार्यक्रम के दौरान डॉ. राजरतन अंबेडकर ने संविधान की भूमिका पर जोर देते हुए कहा, 'भारत की यही खूबसूरती है कि हर सौ किलोमीटर पर लोगों की भाषा, खान-पान और रहन-सहन बदल जाता है, लेकिन 140 करोड़ देशवासियों को एक साथ जोड़े रखने का काम देश के संविधान ने किया है.'

उन्होंने आगे कहा, 'यही संविधान की सबसे बड़ी ताकत और सुंदरता है.'

इसके साथ ही उन्होंने कहा, 'बाबा साहब को संविधान सभा में जाने से रोकने की कोशिशें हुई थीं. वर्णवादी व्यवस्था नहीं चाहती थी कि बाबा साहब संविधान सभा तक पहुंचें. इसके बावजूद उन्होंने संविधान में ऐसे प्रावधान किए, जिनसे पिछड़े और वंचित वर्गों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके.'

डॉ. राजरतन अंबेडकर ने यह भी कहा, 'अखिलेश यादव पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं. अगर वे भी इसमें थोड़ा सा योगदान दे पाते हैं, तो उन्हें इस बात पर गर्व होगा कि वे संविधान बचाने की लड़ाई में शामिल रहे.'

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