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बीजेपी में अलग-थलग पड़े वरुण गांधी क्या वाकई कांग्रेस में होना चाहते हैं शामिल?
यूपी के पीलीभीत से बीजेपी सांसद वरुण गांधी लंबे समय से बीजेपी से नाराज हैं। वे आए दिन बीजेपी सरकार की योजनाओं पर सवाल उठाते रहते हैं। कभी अग्निवीर योजना पर निशाना साधा तो कभी बेरोगजारी और किसानों के मुद्दे पर अपनी ही सरकार को घेरते हैं।
हाल ही में वरुण गांधी एक बार फिर से सुर्खियों में तब आ गए, जब उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के समर्थन में टिप्पणी की। साथ ही उन्होंने अपने चचेरे भाई राहुल गांधी की तरह हिंदू-मुस्लिम की राजनीति पर भी निशाना साधा। इसके बाद से ही संभावना जताई जाने लगी कि वरुण कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, राहुल गांधी ने दोनों की विचारधाराएं अलग-अलग वाला बयान देकर संभावनाओं को खारिज कर दिया।
तीन बार के भाजपा सांसद और पार्टी के पूर्व महासचिव वरुण गांधी के करीबी सूत्रों का कहना है कि राहुल के बयान को और कुछ नहीं समझना चाहिए। 'इंडियन एक्सप्रेस' के अनुसार, यूपी के एक बीजेपी नेता ने कहा, ''सिर्फ इसलिए कि वरुण ने अपने विचार स्वतंत्र रूप से व्यक्त किए हैं और वे विचार भाजपा के विचारों के थोड़े विरोधाभासी हैं, आप यह नहीं कह सकते कि वह कांग्रेस में शामिल होने के इच्छुक हैं। उन्हें जो सही लगता है वह बोलते हैं। जहां तक मुझे याद है उन्होंने कांग्रेस के पक्ष में कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है और न ही कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा जताई है।''
'नीतिगत मुद्दों पर आधारित है वरुण की आलोचना'
सूत्र आगे कहते हैं कि वरुण की आलोचना नीतिगत मुद्दों पर आधारित है और उन्होंने कोई व्यक्तिगत या वैचारिक हमला नहीं किया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि वरुण के लगातार हमलावर होने की वजह से भाजपा कोई नरमी नहीं बरतने वाली है। बीजेपी के एक पदाधिकारी कहते हैं, ''बीजेपी जैसी पार्टी में होने के नाते, जो अनुशासन को बहुत महत्व देती है, वरुण गांधी एक स्वतंत्र संस्था के रूप में कार्य नहीं कर सकते हैं। कोई भी पार्टी बार-बार ऐसे बयानों को बर्दाश्त नहीं कर सकती है जो उसकी सरकारों द्वारा लिए गए फैसलों की आलोचना करते हों। यदि वरुण को कोई आशंका या आपत्ति है तो उसे संबंधित प्राधिकारी को इसकी सूचना देनी चाहिए। आप प्रधानमंत्री या पार्टी अध्यक्ष को पत्र लिखकर उनके पहुंचने से पहले उन्हें ट्विटर पर जारी नहीं कर सकते। यह अनुशासनहीनता है।''
तीन बार चुनाव जीत चुके हैं वरुण गांधी
वरुण गांधी और उनकी मां मेनका गांधी को अक्टूबर 2021 में पुनर्गठित राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटा दिया गया था। वरुण पहली बार साल 2009 में अपनी मां के निर्वाचन क्षेत्र पीलीभीत से सांसद के रूप में बड़े अंतर से जीते। उन्होंने सुल्तानपुर से साल 2014 में चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। तीसरी बार 2019 में वरुण की जीत पीलीभीत से हुई। वरुण गांधी किताबें भी लिख चुके हैं। इसके अलावा, वे देश के नामी-गिरामी अखबारों में लेख भी लिखा करते हैं। इन लेखों में कई बार सरकार की योजनाओं की आलोचना भी करते हैं।
'सरनेम की वजह से तवज्जो चाहते हैं वरुण'
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, ''वरुण गांधी चाहते हैं कि बीजेपी उनके सरनेम की वजह से उन्हें खास तवज्जो दे। लेकिन बीजेपी वंशवाद की राजनीति की विरोधी है और गांधी का वंशज होना इस पार्टी में कोई फायदा नहीं है। उन्हें यह समझना होगा कि वह भाजपा के करीब 400 सांसदों में से एक हैं। उनका विद्रोह मुख्य रूप से मनचाहा पद न मिलने पर उनके असंतोष के कारण है।'' इसके अलावा, भाजपा के कई नेता भी सोचते हैं कि वरुण बीजेपी को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए उकसाना चाहते हैं। एक नेता कहते हैं, ''इससे उन्हें एक फाइटर की छवि मिलेगी और उन्हें बीजेपी से बाहर अपना भविष्य तैयार करने में मदद मिलेगी।''
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