होम उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में महिला मतदाता निभाएंगी अहम भूमिका
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में महिला मतदाता निभाएंगी अहम भूमिका
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का चौथा चरण संपन्न हो चुका है। आगामी 10 मार्च को यह तय हो जाएगा कि इस बार उत्तर प्रदेश में किसकी सरकार बनेगी? क्या योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा फिर से पांच साल जनता की सेवा करेगी या सपा के नेतृत्व में अखिलेश यादव कुर्सी संभालेंगे? उत्तर प्रदेश में चित्र साफ नजर आ रहा है कि इस बार चुनाव एकपक्षीय नहीं है। यह चुनाव विकास के मुद्दों पर एवं आरोप-प्रत्यारोप से घिरे हुए तमाम राजनीतिक उतार-चढ़ाव में अपना वजूद तलाश रहा है। पिछले पांच वर्षों से भाजपा नीत सरकार में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। योगी आदित्यनाथ का दावा है कि पुनः भाजपा की सरकार बनेगी। विकास ही भाजपा के लिए चुनावी मुद्दा है। चौथे चरण के मतदान के बाद बीजेपी द्वारा अपने विकास के कार्यों में महिला सुरक्षा को सबसे बड़ा विषय बनाकर प्रचार किया जा रहा है।
नि:संदेह महिलाओं के प्रति निरंतर बढ़ते अपराध समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। महिलाओं को सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हरसंभव प्रयास किया है। महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए राज्य में सेफ सिटी परियोजना को लागू किया गया। महिलाओं एवं बालिकाओं के साथ छेड़छाड़ रोकने के लिए एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन किया गया। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार की सेफ सिटी योजना में अभी तक राज्य का केवल लखनऊ शहर ही सम्मिलित है। राज्य सरकार ने इसे राज्य के 17 अन्य शहरों में लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए बजट में 97 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। इस योजना में राज्य के सभी नगर निगम वाले शहरों को महिलाओं के लिए सेफ सिटी बनाने की व्यवस्था की जाएगी। सेफ सिटी परियोजना में केंद्र सरकार 40 प्रतिशत और राज्य सरकार 60 प्रतिशत धनराशि व्यय करेगी। केंद्र सरकार ने अपने हिस्से की 62 करोड़ 89 लाख रुपये की धनराशि जारी कर दी है। अब कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, अलीगढ़, बनारस, अयोध्या, मथुरा, शाहजहांपुर, सहारनपुर, गाजियाबाद, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, आगरा, गोरखपुर, झांसी एवं बरेली भी सेफ सिटी बनाए जाएंगे।
सेफ सिटी में महिलाओं की सुरक्षा का दायित्व भी महिला पुलिस कर्मियों पर ही होगा। उनके पास गुलाबी रंग के स्कूटर और एसयूवी वाहन होंगे, जिससे वे अपराधिक तत्वों पर दृष्टि रखेंगी। महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट भी बनाए जाएंगे। ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित किया जाएगा, जहां महिलाओं का आवागमन रहता है और वहां स्ट्रीट लाईट की कोई व्यवस्था नहीं है। वहां पर्याप्त प्रकाश और सुरक्षा की व्यवस्था की जाएगी। बसों में सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन की भी व्यवस्था की जाएगी। यह एक ऐसा बटन है, जिसके माध्यम से संकट की स्थिति में आसानी से इमरजेंसी कॉल की जा सकेगी। इन शहरों में जगह-जगह महिला पुलिस कियोस्क बनाए जाएंगे, जहां महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा। परियोजना पर निगाह रखने के लिए वूमेन पॉवर लाइन 1090 की क्षमता दोगुनी कर दी जाएगी। महिला पुलिस कर्मियों को लाने ले एवं ले जाने के लिए बस और एसयूवी की व्यवस्था की जाएगी। महिला पुलिस कर्मियों को सादे कपड़ों में स्कूल, कॉलेज, अन्य शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थानों आदि के पास भी तैनात किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि पिछले चार वर्ष की समयावधि में स्क्वायड द्वारा 98 लाख 55 हजार 867 व्यक्तियों की चेकिंग करते हुए नौ हजार 948 अभियोग पंजीकृत किए गए तथा 14 हजार 958 व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई, जबकि 41 लाख 21 हजार 745 व्यक्तियों को चेतावनी दी गई।
Leave A comment
महत्वपूर्ण सूचना -
भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।