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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेशवायरल न्यूज़ Alert Star Digital Team Jan 21, 2026 05:53 PM

संत समाज में दो फाड़, ये हर बार पीटे जाते हैं, अविमुक्तेश्वरानंद पर स्वामी जितेंद्रानंद का तीखा हमला

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य पद को लेकर छिड़ा संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा है, बल्कि अब यह लड़ाई संत समाज के भीतर की आपसी कलह में बदल गई है।

संत समाज में दो फाड़, ये हर बार पीटे जाते हैं, अविमुक्तेश्वरानंद पर स्वामी जितेंद्रानंद का तीखा हमला

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य पद को लेकर छिड़ा संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा है, बल्कि अब यह लड़ाई संत समाज के भीतर की आपसी कलह में बदल गई है। अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने इस मामले में एंट्री लेते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बेहद तीखा हमला बोला है। उन्होंने न केवल उनकी पदवी पर सवाल उठाए हैं बल्कि सख्त लहजे में उन पर अव्यवस्था फैलाने का आरोप भी मढ़ा है। जितेंद्रानंद ने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि “ये हर बार पीटे जाते हैं” और उन्होंने स्नान के दौरान जानबूझकर हंगामा खड़ा किया। उनके इस बयान के बाद संतों के बीच मतभेद खुलकर सड़क पर आ गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के दस्तावेजों का दिया हवाला

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने अपने दावों को पुख्ता करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से जुड़े अहम दस्तावेज भी मीडिया के सामने पेश किए। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक अदालत से इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी भी व्यक्ति को शंकराचार्य के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती। उन्होंने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि कोर्ट में मामला लंबित है और आदेश के मुताबिक, न तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और न ही किसी अन्य का पट्टाभिषेक किया जा सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर प्रशासन उन्हें शंकराचार्य मानकर कोई सुविधा देता है, तो यह सीधे तौर पर कोर्ट की अवमानना होगी।

प्रशासन के नोटिस पर क्या बोले अविमुक्तेश्वरानंद?

बता दें कि सोमवार (19 जनवरी) को मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजकर उनके नाम के आगे 'शंकराचार्य' शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी। इस गतिरोध के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने समाधान के लिए अपनी शर्तें रख दी हैं। उन्होंने साफ किया है कि वे संगम में पूरे सम्मान के साथ स्नान करेंगे और उसके बाद ही अपने शिविर में प्रवेश करेंगे। साथ ही, उन्होंने प्रशासन से माफी की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि जिन संन्यासियों, ब्रह्मचारियों और मातृशक्ति के साथ दुर्व्यवहार हुआ है, उनसे पहले क्षमा याचना होनी चाहिए। उनका कहना है कि सम्मानजनक समाधान में हो रही देरी उनकी समझ से परे है।

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