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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेशवायरल न्यूज़ Alert Star Digital Team Jan 21, 2026 05:40 PM

शंकराचार्य ने योगी सरकार को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम, कानूनी नोटिस भेजकर दी अवमानना केस की चेतावनी

प्रयागराज माघ मेले में प्रशासन और संतों के बीच चल रहा टकराव अब कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गया है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए अपने वकील के माध्यम से एक कानूनी नोटिस भेजा है।

शंकराचार्य ने योगी सरकार को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम, कानूनी नोटिस भेजकर दी अवमानना केस की चेतावनी

प्रयागराज माघ मेले में प्रशासन और संतों के बीच चल रहा टकराव अब कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गया है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए अपने वकील के माध्यम से एक कानूनी नोटिस भेजा है। इस नोटिस में योगी सरकार और प्रशासन को साफ अल्टीमेटम दिया गया है कि मेला प्रशासन द्वारा 19 जनवरी को जारी किए गए नोटिस को अगले 24 घंटों के भीतर हर हाल में वापस लिया जाए। ऐसा न करने पर सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना (Contempt of Court) समेत अन्य सख्त कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है।

'प्रतिष्ठा और गरिमा को पहुंचाया नुकसान'

शंकराचार्य की तरफ से भेजे गए इस कानूनी दस्तावेज में 19 जनवरी के सरकारी नोटिस को उनकी मानहानि करने वाला बताया गया है। नोटिस में कहा गया है कि प्रशासन का यह पत्र स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिष्ठा, सम्मान, गरिमा और उनके आर्थिक स्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाला है। वकीलों ने तर्क दिया है कि यह मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में प्रशासन का बीच में नोटिस जारी करना अदालत की गरिमा को चुनौती देने जैसा है। चेतावनी दी गई है कि अगर तय समय में पत्र वापस नहीं लिया गया, तो अवमानना न्यायालय अधिनियम 1971 और संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट में जाली दस्तावेजों का खेल?

इस कानूनी नोटिस में पुराने विवादों का भी विस्तार से जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे 12 अक्टूबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट में उनके पट्टाभिषेक को रोकने के लिए अंतरिम आवेदन दिया गया था। नोटिस में एक बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि उस समय गोवर्धन मठ, पुरी के शंकराचार्य की ओर से कथित तौर पर एक जाली और मनगढ़ंत आवेदन कोर्ट में लगाया गया था। इसके जरिए अदालत को गुमराह किया गया कि उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की नियुक्ति को अस्वीकार कर दिया है।

झूठी गवाही का भी लगाया आरोप

नोटिस के मुताबिक, 14 अक्टूबर 2022 को जब सुनवाई हुई, तब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धार्मिक अनुष्ठान में व्यस्त थे और अपना पक्ष नहीं रख पाए थे, जिसके बाद कोर्ट ने अंतरिम आदेश दिया था। हालांकि, उनका दावा है कि उनका अभिषेक उससे पहले ही हो चुका था, इसलिए वह आदेश व्यावहारिक रूप से बेअसर था। इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 9 मार्च 2024 को सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन देकर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती पर गलत तथ्यों के आधार पर कोर्ट को गुमराह करने और झूठी गवाही (परजरी) की कार्रवाई की मांग की थी। अब देखना यह है कि क्या योगी सरकार 24 घंटे की समय-सीमा के भीतर नोटिस वापस लेती है या यह मामला फिर सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंचता है।

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