होम श्रीराम के बाद अब हनुमान भी हमारे PDA भाई, सपा सांसद के बयान पर मचा घमासान, मकर संक्रांति पर भी की सियासत
समाजवादी पार्टी (सपा) के चंदौली से सांसद वीरेंद्र सिंह ने भगवान राम को समाजवादी बताने के बाद अब एक और विवादास्पद बयान देकर सियासी पारा चढ़ा दिया है। उन्होंने अब बजरंगबली (हनुमान जी) को भी PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) परिवार का हिस्सा बताते हुए उन्हें अपना भाई करार दिया है।
समाजवादी पार्टी (सपा) के चंदौली से सांसद वीरेंद्र सिंह ने भगवान राम को 'समाजवादी' बताने के बाद अब एक और विवादास्पद बयान देकर सियासी पारा चढ़ा दिया है। उन्होंने अब बजरंगबली (हनुमान जी) को भी 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) परिवार का हिस्सा बताते हुए उन्हें अपना भाई करार दिया है। वीरेंद्र सिंह ने मकर संक्रांति के पर्व को भी विचारधारा की लड़ाई से जोड़ते हुए तारीखों पर अजीबोगरीब तर्क पेश किया है।
सांसद वीरेंद्र सिंह ने एबीपी लाइव से बातचीत के दौरान मकर संक्रांति की तारीखों को लेकर एक नया सियासी एंगल निकाल लिया। उन्होंने कहा, "आज (14 जनवरी) मकर संक्रांति मनाने वाले लोग PDA विचारधारा का समर्थन करने वाले लोग हैं, जबकि 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाने वाले लोग मनुवादी सोच के हैं." इसी कड़ी में उन्होंने हनुमान जी को अपनी विचारधारा से जोड़ते हुए कहा, "हनुमान जी भी हमारे PDA भाई हैं. वह भी हमारे विचारधारा के ही हैं."
वाराणसी और आसपास के इलाकों में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी की पुरानी परंपरा है। इस मौके का फायदा उठाते हुए वीरेंद्र सिंह ने 'PDA' लिखी हुई पतंग उड़ाई और सांकेतिक रूप से अपनी पार्टी का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र में होने वाले बीएमसी (BMC) चुनावों में भी समाजवादी पार्टी के पूरी मजबूती से लड़ने का दावा किया।
इससे पहले दिए गए अपने बयान पर कायम रहते हुए सपा सांसद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) केवल 'राजा राम' की उपासक है। उन्होंने तर्क दिया कि भगवान राम ने वनवास के दौरान गरीब, शोषित और वंचितों (PDA) के साथ मिलकर ही रावण को हराया था, इसलिए असली रामभक्त समाजवादी ही हैं।
सपा सांसद के इन बयानों पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने सपा के अतीत को याद दिलाते हुए सवाल किया कि अगर श्रीराम समाजवादी थे, तो मुलायम सिंह यादव ने अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां क्यों चलवाई थीं? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव और श्रीराम की कोई तुलना नहीं हो सकती, लेकिन संतोष इस बात का है कि गलत बयानी के बहाने ही सही, कम से कम अब सपा वाले श्रीराम का नाम तो ले रहे हैं।
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