होम चीन को टक्कर देने की तैयारी, मोदी कैबिनेट का ₹7280 करोड़ की रेयर अर्थ मैग्नेट स्कीम को बड़ा फैसला
भारत सरकार ने चीन द्वारा रेयर अर्थ (Rare Earth) एक्सपोर्ट पर लगाई गई पाबंदियों के बीच एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में ₹7,280 करोड़ रुपये की ठोस दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबकों के विनिर्माण की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दे दी गई
भारत सरकार ने चीन द्वारा रेयर अर्थ (Rare Earth) एक्सपोर्ट पर लगाई गई पाबंदियों के बीच एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में ₹7,280 करोड़ रुपये की 'ठोस दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबकों के विनिर्माण की प्रोत्साहन योजना' को मंजूरी दे दी गई है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि इस योजना का लक्ष्य 6,000 MTPA (मीट्रिक टन प्रति वर्ष) की क्षमता के साथ रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स (REPM) के घरेलू उत्पादन की शुरुआत करना है।
रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स दुनिया के सबसे शक्तिशाली मैग्नेट्स में शामिल हैं। ये निम्नलिखित क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाते हैं:
इलेक्ट्रिक वाहन (EVs)
नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy)
उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स
एयरोस्पेस और रक्षा उपकरण
यह योजना देश में रेयर अर्थ ऑक्साइड्स को धातु में, धातु को मिश्रधातु में और मिश्रधातु से तैयार मैग्नेट बनाने की पूरी प्रक्रिया स्थापित करेगी।
भारत में इन मैग्नेट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है और 2025 की तुलना में 2030 तक यह दोगुनी होने की उम्मीद है। वर्तमान में भारत की जरूरतों को अधिकतर आयात से पूरा किया जाता है।
आत्मनिर्भरता: इस योजना से भारत में पहली बार पूर्ण REPM उत्पादन चेन स्थापित होगी, जिससे विदेशी निर्भरता कम होगी और घरेलू उद्योग मजबूत होंगे।
विकास लक्ष्य: इससे रोजगार सृजन होगा और देश की Net Zero 2070 प्रतिबद्धता को भी समर्थन मिलेगा, जो विकसित भारत 2047 के विजन की दिशा में एक अहम मील का पत्थर है।
यह योजना कुल 7 साल तक चलेगी।
| मद | राशि (करोड़ रुपये) | विवरण |
|---|---|---|
| बिक्री-आधारित प्रोत्साहन | ₹6,450 करोड़ | 5 साल तक REPM बिक्री पर प्रोत्साहन |
| पूंजी सहायता | ₹750 करोड़ | उत्पादन संयंत्र स्थापित करने के लिए |
| कुल योजना | ₹7,280 करोड़ | - |
योजना के तहत कुल उत्पादन क्षमता 5 कंपनियों में बांटी जाएगी, जिसमें प्रत्येक लाभार्थी को अधिकतम 1,200 MTPA क्षमता आवंटित की जाएगी।
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