होम कर्नाटक में फिर बदले हिजाब नियम, स्कूल-कॉलेजों में धार्मिक प्रतीकों की एंट्री; कांग्रेस सरकार ने पलटा 2022 का फैसला

समाचारदेशराजनीति Alert Star Digital Team May 13, 2026 10:39 PM

कर्नाटक में फिर बदले हिजाब नियम, स्कूल-कॉलेजों में धार्मिक प्रतीकों की एंट्री; कांग्रेस सरकार ने पलटा 2022 का फैसला

कर्नाटक सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में ड्रेस कोड को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए 2022 में जारी पुराने आदेश को वापस ले लिया है। नई गाइडलाइन के तहत अब छात्र-छात्राएं यूनिफॉर्म के साथ सीमित धार्मिक और पारंपरिक प्रतीक पहन सकेंगे।

कर्नाटक में फिर बदले हिजाब नियम, स्कूल-कॉलेजों में धार्मिक प्रतीकों की एंट्री; कांग्रेस सरकार ने पलटा 2022 का फैसला

कर्नाटक सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में ड्रेस कोड को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए 2022 में जारी पुराने आदेश को वापस ले लिया है। नई गाइडलाइन के तहत अब छात्र-छात्राएं यूनिफॉर्म के साथ सीमित धार्मिक और पारंपरिक प्रतीक पहन सकेंगे।

सरकार के इस फैसले के बाद अब स्कूल और कॉलेजों में हिजाब पहनने की अनुमति मिल गई है। इसके साथ ही पगड़ी, जनेऊ, शिवधारा और रुद्राक्ष जैसे धार्मिक प्रतीकों को भी मंजूरी दी गई है।

यूनिफॉर्म रहेगी अनिवार्य, लेकिन धार्मिक प्रतीकों की भी होगी अनुमति

नई नीति के अनुसार स्कूल और कॉलेजों में यूनिफॉर्म व्यवस्था जारी रहेगी। हालांकि छात्र निर्धारित यूनिफॉर्म के पूरक रूप में कुछ धार्मिक और पारंपरिक प्रतीक पहन सकेंगे, बशर्ते वे यूनिफॉर्म की मूल भावना को प्रभावित न करें।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि छात्र अब हिजाब, पगड़ी (पेटा), जनेऊ (जनिवारा), शिवधारा और रुद्राक्ष पहनकर शिक्षण संस्थानों में जा सकेंगे।

“प्रवेश से नहीं रोका जा सकता” — सरकार

सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि किसी भी छात्र को धार्मिक या पारंपरिक प्रतीक पहनने की वजह से कक्षा, स्कूल, कॉलेज या परीक्षा हॉल में प्रवेश से नहीं रोका जा सकता।

इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी छात्र को इन्हें पहनने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा और न ही किसी को जबरन इन्हें हटाने के लिए बाध्य किया जा सकेगा।

आदेश में धर्मनिरपेक्षता और समावेशी माहौल पर जोर

सरकार ने अपने आदेश में कहा कि Government of Karnataka का उद्देश्य शिक्षण संस्थानों में अनुशासन बनाए रखने के साथ-साथ धर्मनिरपेक्ष और समावेशी वातावरण सुनिश्चित करना है।

आदेश में कहा गया कि संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता का मतलब व्यक्तिगत आस्थाओं का विरोध नहीं, बल्कि संस्थागत निष्पक्षता और भेदभावरहित व्यवस्था है।

सरकार ने इस दौरान संत Basavanna के “इवानम्मवा” यानी “वह हमारा अपना है” सिद्धांत का भी उल्लेख किया और कहा कि किसी भी छात्र को शिक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

तत्काल प्रभाव से लागू होगा नया आदेश

सरकार ने बताया कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। इसके साथ ही पुराने सभी विरोधाभासी संस्थागत आदेश और स्थानीय प्रस्ताव स्वतः निरस्त माने जाएंगे।

हालांकि राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षाओं के दौरान लागू विशेष ड्रेस कोड नियम पहले की तरह जारी रह सकते हैं।

अधिकारियों को दी गई निगरानी की जिम्मेदारी

राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा आयुक्त और प्री-यूनिवर्सिटी शिक्षा निदेशक को निर्देश दिए हैं कि पूरे राज्य में इन नियमों का समान और भेदभावरहित तरीके से पालन सुनिश्चित किया जाए।

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