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समाचारअर्थ व बाजार Alert Star Digital Team Jul 7, 2026 06:30 PM

E20 Petrol Controversy: क्या सरकार पीछे हटेगी? E10 की बढ़ी मांग के बीच इथेनॉल ब्लेंडिंग पर छिड़ी नई बहस

देश में E20 इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बहस तेज हो रही है। कई यूजर्स दावा कर रहे हैं कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के इंजन खराब हो रहे हैं और माइलेज पर भी असर पड़ रहा है।

E20 Petrol Controversy: क्या सरकार पीछे हटेगी? E10 की बढ़ी मांग के बीच इथेनॉल ब्लेंडिंग पर छिड़ी नई बहस

देश में E20 इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बहस तेज हो रही है। कई यूजर्स दावा कर रहे हैं कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के इंजन खराब हो रहे हैं और माइलेज पर भी असर पड़ रहा है। कुछ वाहन मालिकों की ओर से इंजन की परफॉर्मेंस घटने और तकनीकी दिक्कतों की शिकायतें भी सामने आई हैं। इसी बीच E10 पेट्रोल को दोबारा व्यापक स्तर पर लागू करने की मांग भी उठने लगी है।

बढ़ते विवाद के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में E20 फ्यूल का सुरक्षित उपयोग पिछले ढाई साल से अधिक समय से किया जा रहा है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों को भ्रामक बताते हुए कहा कि E20 कार्यक्रम वैज्ञानिक शोध, विशेषज्ञों की रिपोर्ट और कई देशों के अनुभवों के आधार पर तैयार किया गया है।

क्या होता है E20 इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल?

E20 एक ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। भारत में इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस, खराब अनाज, टूटे हुए चावल और मक्के से किया जाता है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए इथेनॉल मिश्रण से आयात पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा अधिक ऑक्सीजन युक्त होने के कारण इससे कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषकों के उत्सर्जन में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आने का दावा किया जाता है।

क्या E20 से इंजन खराब हो रहे हैं?

सरकार के अनुसार इसका जवाब 'नहीं' है। भारत सरकार, ऑटोमोबाइल रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) तथा मारुति सुजुकी और टोयोटा जैसी ऑटोमोबाइल कंपनियों के सर्विस डेटा के आधार पर यह निष्कर्ष सामने आया है कि E20 के इस्तेमाल से वाहनों के इंजन खराब होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। ARAI, इंडियन ऑयल और भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के वैज्ञानिकों के शोध में भी यह सामने आया कि E20 का उपयोग वाहन के धातु या रबर के पुर्जों को नुकसान नहीं पहुंचाता।

इंजन खराब होने की शिकायतें क्यों आ रही हैं?

सोशल मीडिया पर ऐसे दावे भी वायरल हुए कि गन्ने या अनाज से बने इथेनॉल की वजह से फ्यूल टैंक में चींटियां या मधुमक्खियां जमा हो सकती हैं। सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि Fuel-Grade Ethanol के निर्माण और शुद्धिकरण के दौरान ऐसे रसायनों का उपयोग किया जाता है, जिनसे कीड़े-मकौड़े नहीं आते।

सरकार का कहना है कि इंजन खराब होने की वजह पेट्रोल पंप के अंडरग्राउंड टैंकों में गंदगी या पानी का जमा होना हो सकता है। वहीं इंटरनेट पर वायरल हो रहे उन वीडियो को भी भ्रामक बताया गया है, जिनमें गन्ने का रस सीधे पेट्रोल में मिलाते हुए दिखाया जा रहा है। सरकार के मुताबिक वाहनों में उपयोग होने वाला इथेनॉल कई औद्योगिक प्रक्रियाओं और गुणवत्ता परीक्षणों से गुजरने के बाद ही तैयार किया जाता है।

पुरानी गाड़ियों पर E20 का क्या असर पड़ सकता है?

अप्रैल 2023 से पहले निर्मित अधिकांश वाहन E10 पेट्रोल के अनुरूप तैयार किए गए थे। ऐसे वाहनों में लगातार E20 के उपयोग से गैसकेट, फ्यूल पाइप जैसे कुछ पुर्जे समय के साथ कमजोर हो सकते हैं और उन्हें बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है, हालांकि वे पूरी तरह खराब नहीं होते।

इसके अलावा यदि पुरानी गाड़ी में E20 भरकर 10 से 15 दिन तक बिना चलाए छोड़ दिया जाए, तो पेट्रोल और पानी अलग हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में फ्यूल टैंक या फ्यूल पंप में जंग लगने और वाहन स्टार्ट होने में परेशानी आने की संभावना रहती है।

नई गाड़ियों के लिए E20 सुरक्षित

अप्रैल 2023 के बाद निर्मित वाहनों को E20 फ्यूल के अनुरूप डिजाइन किया गया है। ऐसे वाहनों के इंजन और अन्य पुर्जों को इस प्रकार तैयार किया गया है कि E20 के उपयोग से उन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के डायरेक्टर रेजी मथाई (Reji Mathai) ने पुणे मुख्यालय में कहा, "इस बात का कोई सबूत नहीं है कि E20 से गाड़ियों को बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है."

उन्होंने कहा, "E20 फ्यूल को बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक शोध और कड़ी टेस्टिंग के बाद लॉन्च किया गया है. पुराने और नए वाहनों में लंबे समय तक (40,000 से 50,000 किलोमीटर तक ) इसकी टेस्टिंग की गई है. इनमें टू-व्हीलर, फोर-व्हीलर और 8 से 10 साल पुराने BS-IV वाहन भी शामिल रहे. यह देखा गया है कि E20 के लंबे समय तक इस्तेमाल से गाड़ियों की माइलेज पर क्या असर पड़ता है, फ्यूल की बचत हो रही है या नहीं, ओवरऑल परफॉर्मेंस कैसा है."

उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया पोस्ट के बजाय अधिकृत सर्विस सेंटरों पर भरोसा करने की अपील भी की।

क्या फिलहाल नहीं आएगा E25 पेट्रोल?

सरकारी सूत्रों के अनुसार E25 फ्यूल अभी टेस्टिंग चरण में है और इसे फिलहाल लागू करने की कोई योजना नहीं है। विभिन्न कंपनियों और मॉडल की गाड़ियों पर इसकी कम्पैटिबिलिटी टेस्टिंग जारी है। अंतिम परिणाम आने के बाद ही इस पर आगे निर्णय लिया जाएगा।

सूत्रों का यह भी कहना है कि सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारी भारत की ऊर्जा सुरक्षा संबंधी प्रयासों को कमजोर करने की साजिश हो सकती है। उनका मानना है कि ऐसे लोग या समूह इस तरह की अफवाहों को बढ़ावा दे रहे हैं, जो नहीं चाहते कि भारत आयातित ईंधन पर अपनी निर्भरता कम करे।

E20 पर पेट्रोल डीलर्स ने क्या कहा?

E20 लागू होने के बाद कई पेट्रोल पंप संचालकों और ग्राहकों के बीच विवाद की स्थिति भी देखने को मिल रही है। कई ग्राहक अपनी गाड़ियों में आने वाली तकनीकी समस्याओं के लिए सीधे E20 पेट्रोल को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सशांक शेखर साहू ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में सरकार से इथेनॉल नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की। उनका कहना है कि पहले से खराब वाहन होने पर भी लोग पेट्रोल पंप पर आकर विवाद कर रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार E10 पेट्रोल उपलब्ध कराए तो स्थिति बेहतर हो सकती है। उनके अनुसार दुनिया के अधिकांश देशों में E10 ईंधन का ही अधिक उपयोग होता है।

किन देशों में इस्तेमाल होता है इथेनॉल-ब्लेंडेड ईंधन?

इथेनॉल-ब्लेंडेड ईंधन का उपयोग दुनिया के कई देशों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इनमें ब्राजील, थाईलैंड, भारत, पैराग्वे, स्वीडन, अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, चीन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और कोलंबिया शामिल हैं। इसके अलावा कई मध्य अमेरिकी देशों में भी इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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