होम दिल्ली पुलिस के अपने ही जवानों का प्रदर्शन! CJP ने पूछा- क्या अब पुलिसकर्मियों से भी भरवाया जाएगा Peace Bond?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास और पार्टी की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने इस घटनाक्रम को लेकर दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए हैं।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर पुलिसकर्मियों के जुटने का मामला अब चर्चा में आ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास और पार्टी की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने इस घटनाक्रम को लेकर दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए हैं। दोनों ने पुलिसकर्मियों से पहले पीस बॉन्ड भरवाए जाने की कार्रवाई का हवाला देते हुए पूछा कि क्या अब अपने ही विभाग के अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों पर भी इसी तरह की कार्रवाई होगी। इस मामले में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी दिल्ली पुलिस पर तंज कसा है।
सौरव दास ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर न्यूज एजेंसी IANS का एक वीडियो रीशेयर किया। वीडियो में दिल्ली पुलिस के अधिकारी पुलिस मुख्यालय के बाहर खड़े दिखाई दे रहे हैं। इस घटनाक्रम को लेकर सौरव दास ने अपने पोस्ट में दिल्ली पुलिस से सवाल किया, ‘क्या इन पुलिस वालों से शांति भंग करने के लिए जबरन पीस बॉन्ड साइन कराया जाएगा?’
Will these police personnel be forced to sign peace bond for breach of peace?
— Saurav Das (@SauravDassss) November 2, 2026
उनका यह सवाल दिल्ली पुलिस की ओर से पहले पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर कराए जाने की कार्रवाई के संदर्भ में आया है। सौरव दास ने इसी आधार पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाया और पूछा कि क्या अपने ही विभाग के पुलिसकर्मियों के मामले में भी ऐसा ही रुख अपनाया जाएगा।
कॉकरोच जनता पार्टी की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मामले को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दिल्ली पुलिस की संभावित कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए लिखा, ‘देखते हैं कि क्या दिल्ली पुलिस, थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन करने वाले दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को हिरासत में लेगी और फिर उन्हें रिहा करते वक्त श्योरिटीज पेश करने के कहेगी.’
रत्ना सिंह की इस टिप्पणी में पुलिसकर्मियों के खिलाफ संभावित कार्रवाई और रिहाई के दौरान जमानत के लिए श्योरिटी पेश करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाया गया है।
न्यूज एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस मुख्यालय (PHQ) के गेट नंबर-1 के बाहर करीब 80 पुलिसकर्मी एकत्र हुए थे। वे ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO अरुण कुमार के तबादले के विरोध में अपनी बात रखने के लिए जुटे थे। पुलिसकर्मी इस मामले पर पुलिस कमिश्नर से चर्चा करना चाहते थे।
रिपोर्ट के अनुसार, शाहदरा थाने की घटना के बाद पुलिसकर्मियों को सड़क पर प्रदर्शन नहीं करने के लिए कहा गया था। इसी पृष्ठभूमि में पुलिस मुख्यालय के बाहर अधिकारियों के जुटने और इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं ने मामले को चर्चा में ला दिया है।
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी इस घटनाक्रम पर दिल्ली पुलिस को घेरा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर नई दिल्ली के उस इलाके में आता है जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) धारा 163 लगी हुई है. तो क्या दिल्ली पुलिस, अपने ही विभाग से नाराज पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करेगी?'
नेहा बोरा ने अपने सवाल के जरिए यह मुद्दा उठाया कि यदि संबंधित क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है, तो वहां जुटे पुलिसकर्मियों के मामले में दिल्ली पुलिस क्या कार्रवाई करेगी। फिलहाल, इस घटनाक्रम को लेकर CJP और AISA की ओर से उठाए गए सवालों ने पुलिस विभाग के भीतर विरोध प्रदर्शन और नियमों के समान अनुपालन को लेकर बहस छेड़ दी है।
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