होम CJI BR Gavai Attack Attempt: CJI गवई पर जूता फेंकने की कोशिश पर विपक्ष भड़का, सोनिया-राहुल ने की कड़ी निंदा, बोले—ये संविधान पर हमला है
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को उस वक्त सनसनी फैल गई, जब 71 वर्षीय एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी. आर. गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश की। हालांकि, जूता गवई तक नहीं पहुंचा और अदालत की सुरक्षा ने तुरंत स्थिति संभाल ली।
CJI BR Gavai Attack Attempt: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को उस वक्त सनसनी फैल गई, जब 71 वर्षीय एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी. आर. गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश की। हालांकि, जूता गवई तक नहीं पहुंचा और अदालत की सुरक्षा ने तुरंत स्थिति संभाल ली। घटना के बाद सीजेआई ने संयम बनाए रखा और अदालत की कार्यवाही जारी रखने को कहा। इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे लोकतंत्र व न्यायपालिका की गरिमा पर हमला बताया।
कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट में भारत के माननीय प्रधान न्यायाधीश पर हुए हमले की निंदा के लिए कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं हैं। यह सिर्फ उन पर नहीं, बल्कि हमारे संविधान पर भी हमला है। राष्ट्र को एकजुट होकर इस घटना की निंदा करनी चाहिए।”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स (Twitter) पर लिखा, “मुख्य न्यायाधीश पर हमले की कोशिश शर्मनाक और घृणित है। यह न्यायपालिका की गरिमा और कानून के शासन पर हमला है। जब एक व्यक्ति योग्यता और दृढ़शक्ति से सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचता है और उसे निशाना बनाया जाता है, तो यह बेहद चिंताजनक है।”
उन्होंने कहा कि यह घटना दिखाती है कि पिछले एक दशक में नफरत और कट्टरता किस तरह समाज में गहराई तक फैल चुकी है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पोस्ट करते हुए कहा, “मुख्य न्यायाधीश पर हमला हमारी न्यायपालिका की गरिमा और संविधान की भावना पर हमला है। हमारे देश में ऐसी नफरत के लिए कोई जगह नहीं है और इस तरह की हरकत की निंदा होनी चाहिए।”
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, “यह सिर्फ देश के प्रधान न्यायाधीश पर नहीं, बल्कि हमारे संविधान और न्याय व्यवस्था पर हमला है। न्यायमूर्ति गवई ने अपनी मेहनत और योग्यता से सर्वोच्च पद हासिल किया है, ऐसे में उन पर हमला लोकतंत्र के लिए घातक है।”
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कानून मंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा, “यह घटना न्यायालय की गरिमा का अपमान है। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी चौंकाने वाली है।”
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने कहा, “सीजेआई पर हमला हमारे लोकतंत्र के सर्वोच्च न्यायिक संस्थान पर हमला है। इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। समाज में अभी भी वर्ण और दमनकारी मानसिकता गहराई तक मौजूद है।”
आप सांसद संजय सिंह ने कहा, “नफरतियों की हिम्मत देखिए, उन्होंने देश के प्रधान न्यायाधीश पर हमला करने की कोशिश की। यह मोदी राज में बढ़ती नफरत की पराकाष्ठा है।”
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा, “यह एक अत्यंत निंदनीय घटना है और भारत के संविधान पर हमला है। मैं व्यक्तिगत रूप से न्यायमूर्ति गवई के साथ हूं।”
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