होम संसद में आसान नहीं है वन नेशन-वन इलेक्शन बिल पास कराना, आसान शब्दों में समझें पूरा गणित

समाचारदेश Alert Star Digital Team Dec 17, 2024 08:36 PM

संसद में आसान नहीं है वन नेशन-वन इलेक्शन बिल पास कराना, आसान शब्दों में समझें पूरा गणित

संसद में आसान नहीं है वन नेशन-वन इलेक्शन बिल पास कराना, आसान शब्दों में समझें पूरा गणित

संसद में आसान नहीं है वन नेशन-वन इलेक्शन बिल पास कराना, आसान शब्दों में समझें पूरा गणित

एक देश एक चुनाव से जुड़ा बिल कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में बिल पेश किया. इसके तहत संविधान के 129वां संशोधन बिल और यूनियन टेरिटरी लॉ अमेंडमेंट बिल-2024 पेश किया गया. लोकसभा में बिल को स्थापित करने को लेकर भी वोटिंग का सामना करना पड़ा. बिल को स्थापित करने के पक्ष में 269 वोट पड़े जबकि विरोध में 198 में वोट पड़े. इस तरह से सिंपल मेजॉरिटी के जरिए बिल को स्थापित किया जा सका. इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बिल को जेपीसी में भेजने की वकालत की.वन नेशन वन इलेक्शन संविधान संशोधन बिल है, लिहाजा इसके लिए दो तिहाई बहुमत की दरकार होगी. केंद्र सरकार के सामने ये मजबूरी है इसलिए इसके लिए जेपीसी का रास्ता चुना गया. इसमें आम सहमति या कम से कम हाशिए पर खड़े दलों को जेपीसी के जरिए कन्विंस कर बिल पास किया जा सके. केंद्र सरकार के लिए वन नेशन वन इलेक्शन बिल को पास कराना आसान नहीं है. आइए समझते हैं बिल पास कराने का पूरा गणित.
राज्यसभा की 245 सीटों में एनडीए के पास 112 सीटें
‘एक देश एक चुनाव’ के लिए सरकार दो बिल लाई है. इनमें एक संविधान संशोधन का बिल है. इसके लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है. लोकसभा की 543 सीटों में एनडीए के पास अभी 292 सीटें हैं. दो तिहाई बहुमत के लिए 362 का आंकड़ा जरूरी है यानी एनडीए के पास बहुमत से करीब 70 सांसद कम हैं.राज्यसभा की 245 सीटों में एनडीए के पास अभी 112 सीटें हैं. 6 मनोनीत सांसदों का भी उसे समर्थन और एक निर्दलीय सांसद का समर्थन बीजेपी के साथ है यानी 119 वोट केंद्र सरकार के पक्ष में हैं. विपक्ष के पास 85 सांसद हैं. राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के लिए 164 सांसदों की जरूरत है. यानी राज्यसभा में भी बीजेपी के पास 45 सांसदों का अभाव है. चूंकि केंद्र सरकार के पास इस बिल को पास कराने के लिए नंबर नहीं हैं लिहाजा इस बिल पर जेपीसी के जरिए सर्वसम्मति बनाने का प्रयास करेगी. यह 129वां संशोधन विधेयक होगा.
पूर्व राष्ट्रपति ने इस पहल को बताया था ‘गेम-चेंजर’
बता दें कि एक देश एक चुनाव के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को समिति का चेयरमैन बनाया गया था. उनकी सिफारिशों के बाद अब इसे कैबिनेट से भी पास कर दिया गया है. रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में बनी समिति ने मोदी कैबिनेट को सिफारिश भेजी थी जिसके बाद इसपर मुहर लगा दी गई. पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने इस पहल को भारत के लोकतंत्र के लिए “गेम-चेंजर” बताया था. अब केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस बिल को संसद में पेश किया है. इन मसौदा कानूनों का उद्देश्य देश भर में एक साथ चुनाव कराना है.
एनडीए के सभी घटक दल इसके समर्थन में हैं. चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी, शिवसेना शिंदे गुट, जेडीयू, लोजपा सहित एनडीए के घटक दलों ने आज बिल को स्थापित करने में केंद्र सरकार का साथ दिया. एक गैर एनडीए दल YSRCP ने भी इस बिल पर केंद्र सरकार को समर्थन दिया है. वहीं कांग्रेस, आप और तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी सहित इंडिया गठबंधन के विपक्षी दलों ने क्षेत्रीय स्वायत्तता और चुनावी निष्पक्षता पर एक साथ चुनावों के प्रभाव के बारे में चिंता जताई है. उनका तर्क है कि यह कदम सत्ता को केंद्रीकृत कर सकता है और संघीय सिद्धांतों को कमजोर कर सकता है. कोविंद कमेटी का मानना है की एक देश एक चुनाव भागीदारी को प्रोत्साहित कर सकते हैं और संभावित रूप से जीडीपी को 1.5% तक बढ़ा सकते हैं.
47 राजनीतिक दलों ने राय दी थी
इस मुद्दे पर बनी रामनाथ कोविंद समिति को कंसल्टेशन के क्रम में 47 राजनीतिक दलों ने अपनी राय दी थी. इनमें से 32 दलों ने समर्थन किया था और 15 दलों ने विरोध किया था. विरोध करने वालों दलों की लोकसभा सांसदों की संख्या 205 है. यानी बिना इंडिया गठबंधन के समर्थन के संविधान संशोधन बिल पारित होना मुश्किल होगा.विधेयक की कॉपी की बात करें तो अगर किसी लोकसभा या विधानसभा में समय से पहले चुनाव करना है तो संसद या फिर विधानसभा को भंग करना पड़ेगा. विधेयक में आर्टिकल 82 (A) को शामिल करने का प्रस्ताव है जिसके तहत सभी विधानसभाओं और लोकसभा के चुनाव साथ में कराए जाएंगे. इसके अलावा आर्टिकल 83 में भी संशोधन करना पड़ेगा. इसमें संसद के सदनों के कार्यकाल की बात कही गई है. इसके अलावा आर्टिकल 172 और 327 में भी संशोधन करना होगा. इन आर्टिकल में विधानसभा के बारे में संसद को नियम बनाने का अधिकार दिया गया है.पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में समिति बनाई थी. 14 मार्च 2024 को समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी. एकसाथ चुनाव कराने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विधेयक में संकेत यही मिलता है कि बिल पर सहमति बनने और पास होने के बाद भी यह प्रक्रिया 2034 से पहले लागू नहीं हो पाएगा.

Alert Star Digital Team

Alert Star Digital Team

एलर्ट स्टार नाम की पत्रिका और फिर समाचार-पत्र का जन्म हुआ। हमारा प्रयास कि हम निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता का वह स्वरूप अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करे। जो लोगो के मन मस्तिष्क में एक भरोसे के रूप में काबिज हो।

Leave A comment

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।

Recent Updates

Most Popular

(Last 14 days)