होम KPPL Bank Fraud Case में ED का बड़ा Action, 150 से ज्यादा Shell Companies के खाते Freeze; 64 करोड़ की संपत्ति पर रोक
कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड (KPPL) से जुड़े 280 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक फ्रॉड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED के कोलकाता जोनल ऑफिस-I की टीम ने 3 सितंबर को पश्चिम बंगाल में 12 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड (KPPL) से जुड़े 280 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक फ्रॉड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED के कोलकाता जोनल ऑफिस-I की टीम ने 3 सितंबर को पश्चिम बंगाल में 12 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत की गई।
एजेंसी के मुताबिक, इस कार्रवाई में 150 से अधिक शेल कंपनियों और व्यक्तियों के बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं। इसके अलावा शेयर, म्यूचुअल फंड और डेट सिक्योरिटीज सहित अन्य वित्तीय निवेश पर भी रोक लगाई गई है। फ्रीज किए गए बैंक बैलेंस और वित्तीय संपत्तियों की कुल कीमत करीब 64 करोड़ रुपये बताई गई है।
ED ने यह जांच Serious Fraud Investigation Office (SFIO) की ओर से कोलकाता की दूसरी विशेष अदालत में दायर शिकायत के आधार पर शुरू की। मामला KPPL और उससे जुड़े लोगों के कारोबारी लेन-देन से संबंधित है। कंपनी के मामलों की जांच का आदेश Corporate Affairs Ministry (MCA) की ओर से दिया गया था।
यह कार्रवाई Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) की ओर से उन कंपनियों की सूची भेजे जाने के बाद हुई, जिनके संबंध में Resolution Professional ने NCLT के सामने कथित 'Avoidance Transactions' को लेकर आवेदन दायर किए थे।
ED की जांच में आरोप लगाया गया है कि KPPL और उसके निदेशकों ने कथित तौर पर गलत जानकारी दी, महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया और कंपनी के खातों में हेरफेर किया। एजेंसी के मुताबिक, इस तरीके से कंसोर्टियम बैंकों को वित्तीय सुविधाएं मंजूर करने और रकम जारी करने के लिए कथित रूप से प्रेरित किया गया।
बाद में कंपनी Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के तहत Liquidation में चली गई। परिसमापन प्रक्रिया के दौरान बैंकों को करीब 7 करोड़ रुपये ही वापस मिल सके। इससे बैंकों को लगभग 97.5 फीसदी का 'Haircut' उठाना पड़ा।
ED के अनुसार, लिक्विडेटर ने IBC की धारा 66 और 67 के तहत आवेदन दाखिल कर कथित Avoidance Transactions को सामने रखा था। एजेंसी का आरोप है कि कंपनी से रकम फर्जी लेन-देन के जरिए संबंधित कंपनियों में ट्रांसफर की गई।
जांच के मुताबिक, बाद में इसी रकम का इस्तेमाल प्रमोटरों, उनके परिवार के सदस्यों और उनके नियंत्रण वाली कंपनियों के नाम पर संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया। ED अब इन लेन-देन के जरिए कथित तौर पर बनाई गई संपत्तियों और रकम के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
जांच के दौरान ED को कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में दर्जनों अचल संपत्तियों के बारे में जानकारी मिली है। एजेंसी का आरोप है कि इन संपत्तियों को अपराध से अर्जित रकम यानी Proceeds of Crime के जरिए खरीदा गया।
ED के मुताबिक, इन संपत्तियों से प्रमोटरों को करीब 26 लाख रुपये प्रति माह किराये की आय हो रही थी। एजेंसी अब इन संपत्तियों और उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है।
तलाशी के दौरान ED को कथित तौर पर पता चला कि कंपनी के प्रमोटर विजय बोथरा और प्रशांत बोथरा 100 से अधिक शेल कंपनियों को नियंत्रित कर रहे थे। एजेंसी का आरोप है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल बैंक फ्रॉड से हासिल रकम को अलग-अलग माध्यमों से घुमाने और Money Laundering के लिए किया जा रहा था।
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि बड़ी रकम रिश्तेदारों और डमी डायरेक्टरों के नाम के जरिए विदेशों में निवेश की गई। ED इन कंपनियों और उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को खंगाल रही है।
ED की तलाशी कार्रवाई में 150 से अधिक शेल कंपनियों और व्यक्तियों के बैंक खाते फ्रीज किए गए। इसके साथ ही शेयर, म्यूचुअल फंड, डेट सिक्योरिटीज और अन्य वित्तीय निवेश पर भी रोक लगाई गई है।
एजेंसी के मुताबिक, फ्रीज किए गए बैंक बैलेंस और अन्य वित्तीय संपत्तियों का कुल मूल्य करीब 64 करोड़ रुपये है। यह कार्रवाई कथित बैंक फ्रॉड से जुड़े फंड और उससे बनाई गई संपत्तियों पर शिकंजा कसने के तौर पर देखी जा रही है।
तलाशी अभियान के दौरान ED ने कथित आपत्तिजनक डिजिटल साक्ष्य, कंपनी रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और संपत्तियों से संबंधित कागजात भी जब्त किए हैं। एजेंसी अब जब्त की गई डिजिटल सामग्री और दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है।
ED का उद्देश्य कथित अपराध से अर्जित रकम के पूरे नेटवर्क, उससे जुड़े लेन-देन और उससे खरीदी गई अन्य संपत्तियों का पता लगाना है। एजेंसी ने बताया है कि इस मामले में आगे की जांच जारी है।
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