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समाचारदेश Alert Star Digital Team Dec 13, 2024 10:21 PM

महाराष्ट्र में अजित पवार के बढ़े विधायक, फिर सरकार में डिमोशन क्यों?

महाराष्ट्र में अजित पवार के बढ़े विधायक, फिर सरकार में डिमोशन क्यों?

महाराष्ट्र में अजित पवार के बढ़े विधायक, फिर सरकार में डिमोशन क्यों?

सरकार गठन के 9 दिन बाद महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस कैबिनेट विस्तार करने जा रहे हैं. फडणवीस कैबिनेट में बीजेपी, शिवसेना (शिंदे) और एनसीपी (अजित) के अलावा कुछ छोटी पार्टियों के नेताओं को भी जगह मिलने की बात कही जा रही है. कैबिनेट का जो फॉर्मूला अभी तक सामने आया है, उसमें अजित पवार को झटका लगता दिख रहा है. वो भी तब, जब विधानसभा के चुनाव में अजित की पार्टी का स्ट्राइक रेट सबसे बेहतर रहा है.


5 विधायक पर एक मंत्री का फॉर्मूला
कैबिनेट विस्तार को लेकर जो तस्वीर सामने आई है, उसके मुताबिक 5 विधायक पर एक मंत्री पद दिए जाएंगे. इस फॉर्मूले के हिसाब से अजित पवार को अधिकतम 8 मंत्री पद मिल सकता है. वर्तमान में अजित कैबिनेट में शामिल हो चुके हैं.एकनाथ शिंदे की सरकार में अजित के कुल 9 मंत्री थे. यानी इस फॉर्मूले से उन्हें एक कैबिनेट मंत्री को ड्रॉप करना होगा. अजित किसे ड्राॅप करेंगे, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है. क्योंकि अजित कोटे के सभी मंत्री जीतकर विधानसभा पहुंच गए हैं.
डिप्टी स्पीकर पर भी सस्पेंस बरकरार
पिछली सरकार में अजित पवार के पास डिप्टी स्पीकर का पद था. अजित के नरहरि जिरवाल इस पद पर काबिज थे. इस बार डिप्टी स्पीकर का पद शिवसेना (उद्धव) मांग रही है. उद्धव की पार्टी का तर्क है कि इसे परंपरा के हिसाब से विपक्ष को दिया जाना चाहिए.
2019 में सत्ता की दूसरी बड़ी पार्टी एनसीपी को यह पद मिला था. इस पर डिप्टी स्पीकर पद पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना की भी नजर है. सरकार में शिवसेना दूसरी बड़ी पार्टी है. कहा जा रहा है कि अगर शिंदे सेना इस पद को लेकर अड़ जाती है तो उसे ही यह पद मिलेगा.
विभाग बंटवारे में भी अजित का डिमोशन
विभाग बंटवारे में भी अजित गुट को ज्यादा तरजीह नहीं मिली है. टीवी-9 मराठी की एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त और गृह विभाग बीजेपी अपने पास ही रखेगी. 2022 में जब शिंदे और बीजेपी का गठबंधन हुआ था, तब भी बीजेपी ने इसे अपने पास रखा था, लेकिन 2023 में अजित के आने के बाद वित्त विभाग उन्हें दे दिया गया था.हालांकि, अब अजित को लोक निर्माण और सार्वजनिक संपत्ति विभाग दिए जाने की बात कही जा रही है. एकनाथ शिंदे को शहरी विकास और राजस्व विभाग मिलने की बात कही जा रही है.शिंदे सरकार में राजस्व विभाग बीजेपी ने अपने पास ही रखा था. अजित को अगर वित्त नहीं मिलता है तो यह पहली बार होगा, जब वे डिप्टी सीएम तो होंगे, लेकिन बिना वित्त विभाग के साथ.
अजित का डिमोशन क्यों? 2 वजहें
1. विधायकों की संख्या और समीकरण
अजित जब एनडीए में आए थे, उस वक्त का समीकरण अलग था. बीजेपी एकनाथ शिंदे और अजित पवार को जोड़कर आगे चल रही थी, इसलिए अजित को कैबिनेट में तरजीह दी गई, लेकिन अब समीकरण बदल गए हैं.बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी तो इस बार भी है, लेकिन इस बार उसकी सरकार किसी पर ज्यादा निर्भर नहीं है. बीजेपी बहुमत से सिर्फ 13 कदम दूर है, जिसे वो आसानी से कभी भी छू सकती है.यही वजह है कि इस बार कोई भी सहयोगी पार्टी बीजेपी पर दबाव नहीं बना पार ही है. अजित पवार तो बिल्कुल रिस्क मोड में नहीं जाना चाहते हैं.
2. सीटें ज्यादा पर चाचा से वोट कम
अजित पवार की पार्टी को भले ही सीटें विधानसभा की 41 मिली है, लेकिन उसके वोट चाचा शरद पवार से काफी कम है. चुनाव आयोग के मुताबिक अजित पवार की पार्टी को 9 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि शरद पवार की पार्टी ने 11 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं. हालांकि, सीनियर पवार समर्थित 10 ही उम्मीदवार चुनाव जीत पाए हैं.सीट छोड़ दिया जाए तो वोटों के मामले में शरद पवार अभी भी आगे हैं. हाल ही में उन्होंने इसे मुद्दा भी बनाया था. कहा जा रहा है कि अजित को इस बार एनडीए के जबर्दस्त वोट मिले हैं.2014 और 2019 के चुनाव में एनसीपी को 17-17 प्रतिशत वोट मिले थे. इस बार दोनों को संयुक्त रूप से करीब 21 प्रतिशत वोट मिले हैं. यानी करीब 4 प्रतिशत ज्यादा.यह 4 प्रतिशत मत अजित के तरफ जाने की बात कही जा रही है.

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