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समाचारराजनीति Alert Star Digital Team Dec 10, 2024 09:27 PM

औंधे मुंह गिरेगा अविश्वास प्रस्ताव फिर जगदीप धनखड़ के खिलाफ INDIA गठबंधन ने क्यों दिया नोटिस?

औंधे मुंह गिरेगा अविश्वास प्रस्ताव फिर जगदीप धनखड़ के खिलाफ INDIA गठबंधन ने क्यों दिया नोटिस?

औंधे मुंह गिरेगा अविश्वास प्रस्ताव फिर जगदीप धनखड़ के खिलाफ INDIA गठबंधन ने क्यों दिया नोटिस?


राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ इंडिया गठबंधन ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है. देश के इतिहास में यह पहला मौका है, जब राज्यसभा के किसी सभापति के खिलाफ विपक्ष की तरफ से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है. हालांकि, सदन का जो नंबर गेम है, उससे सभापति की कुर्सी से धनखड़ को हटाना आसान नहीं है.राज्यसभा और लोकसभा दोनों ही जगहों का नंबर धनखड़ के पक्ष में है. ऐसे में सवाल उठता है कि फिर विपक्ष ने धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस क्यों दिया है?
पहले जानिए अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया क्या है?
राज्यसभा में सभापति के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 67-a के तहत अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है. अविश्वास प्रस्ताव के लिए कम से कम 50 सांसदों का हस्ताक्षर जरूरी है. अविश्वास प्रस्ताव राज्यसभा के महासचिव को सौंपा जाता है, जिसे सभापति को सूचना देकर सदन के पटल पर लाया जाता है.राज्यसभा में जब अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस आता है, तो सभी सांसद पहले इस पर बोलते हैं और फिर मतदान कराया जाता है. राज्यसभा में मतदान के बाद इसे लोकसभा में भेज दिया जाता है. लोकसभा में भी इस प्रस्ताव पर पहले बहस कराई जाती है और फिर वोटिंग की प्रक्रिया पूरी की जाती है.
दोनों जगहों पर प्रस्ताव पास होने की स्थिति में सभापति को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ती है.
अब जानिए राज्यसभा और लोकसभा का नंबर गेम
राज्यसभा के सभापति देश के उपराष्ट्रपति होते हैं, इसलिए उन्हें हटाने के लिए दोनों सदनों में साधारण बहुमत की जरूरत होती है. लोकसभा में अभी 543 सदस्य हैं, जहां सत्ता पक्ष के पास कुल 293 सांसद हैं.
विपक्ष को 249 सांसदों का समर्थन प्राप्त है, जो 272 के बहुमत के आंकड़े से करीब 23 कम है. सत्ता पक्ष के समर्थन में जो भी दल अभी है, उसमें से किसी की भी नाराजगी की खबर नहीं है. ऐसे में लोकसभा में शायद ही धनखड़ के खिलाफ प्रस्ताव पास हो सके.
बात राज्यसभा की करें तो राज्यसभा में वर्तमान में एनडीए गठबंधन के पास पूर्ण बहुमत है. विपक्ष 100 के आंकड़े के करीब ही है. राज्यसभा में अभी भी मनोनीत सांसदों के 4 पद रिक्त हैं. वहीं 6 सीटों के लिए उपचुनाव हो रहे हैं, जहां 5 पर एनडीए की जीत तय है.राज्यसभा में कुल 245 सदस्य होते हैं, जहां बहुमत के लिए 123 सदस्यों की जरूरत होती है. अकेले बीजेपी के पास 95 सदस्य हैं. जेडीयू के पास 4 सदस्य है. 6 मनोनीत सांसद हैं, जो आम तौर पर सरकार का ही समर्थन करते हैं.कुल आंकड़े अगर देखा जाए तो अभी एनडीए के पास 125 सांसदों का समर्थन है. इसके अलावा बीजेडी के 7 और वाईएसआर के 8 सांसद ऐसे हैं, जो इंडिया गठबंधन के विरोध में रहते हैं.
फिर विपक्ष ने क्यों दिया नोटिस?
पहला कारण- सदन में बोलने का मौका मिलेगा
संसद के शीतकालीन सत्र में अब तक विपक्ष को किसी भी बड़े मुद्दे पर बोलने का मौका नहीं मिला है. अगर जगदीप धनखड़ के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बहस कराई जाती है तो सभी पार्टियों के लोकसभा और राज्यसभा के कुछ सांसदों को इस पर बोलने का मौका मिल सकता है.राज्यसभा में बहस के दौरान सभापति अपने चेयर पर नहीं होंगे. ऐसे में विपक्ष के सांसद और खुलकर उनके खिलाफ अपनी बातें रख सकते हैं. साथ ही उन मुद्दों को भी उठा सकते हैं, जिस पर सदन में बहस नहीं हो पा रही है.इनमें उद्योगपति गौतम अडानी का मुद्दा प्रमुख है. कांग्रेस लंबे वक्त से राज्यसभा और लोकसभा में इस मुद्दे पर बहस की डिमांड कर रही है, लेकिन नियमों का हवाला देकर इसे बहस के विषय में शामिल नहीं कराया जा रहा है.
दूसरा कारण- इतिहास के जरिए प्रतीकात्मक विरोध
देश में अब तक किसी भी सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं आया है. जगदीप धनखड़ के खिलाफ अगर प्रस्ताव पटल पर आता है तो यह सभापति के खिलाफ इतिहास का पहला अविश्वास प्रस्ताव होगा.भविष्य में जब-जब इस तरह के अविश्वास प्रस्ताव का जिक्र होगा, तब-तब धनखड़ का उदाहरण दिया जाएगा. विपक्ष के सांसद लंबे वक्त से धनखड़ पर सत्ता पक्ष के लिए काम करने का आरोप लगा रहे हैं.अगस्त 2024 में भी धनखड़ के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर लिया था, लेकिन उस वक्त संसद का सत्र ही अनिश्चितकालीन वक्त के लिए स्थगित कर दी गई थी
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश का कहना है कि यह कष्टदायी है, लेकिन मजबूरन लाना पड़ा है. विपक्षी सांसदों का कहना है कि धनखड़ अपने उन नियमों का भी पालन नहीं कर रहे हैं, जो उन्होंने 2022 में लागू किया था.सभापति की कुर्सी पर बैठने के बाद धनखड़ ने कहा था कि मैं 4 लोगों (प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और एचडी देवेगौड़ा) को बोलने से कभी नहीं रोकूंगा.हालांकि, खरगे के न बोलने देने को लेकर कई बार धनखड़ कांग्रेस सांसदों के निशाने पर आ चुके हैं. सोमवार को तो खुद खरगे ही सभापति पर भड़क गए.


 

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