होम क्या है एलन मस्क की स्टारलिंक? भारत में मिलने वाला है लाइसेंस, करना होगा ये काम; सिंधिया ने समझाया

समाचारदेश Alert Star Digital Team Nov 12, 2024 08:49 PM

क्या है एलन मस्क की स्टारलिंक? भारत में मिलने वाला है लाइसेंस, करना होगा ये काम; सिंधिया ने समझाया

क्या है एलन मस्क की स्टारलिंक? भारत में मिलने वाला है लाइसेंस, करना होगा ये काम; सिंधिया ने समझाया

क्या है एलन मस्क की स्टारलिंक? भारत में मिलने वाला है लाइसेंस, करना होगा ये काम; सिंधिया ने समझाया

केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को कहा कि उद्योगपति एलन मस्क के स्वामित्व वाली स्टारलिंक को भारत में सेवाओं के लिए लाइसेंस हासिल करने के वास्ते सभी मानदंडों का पालन करना होगा।

मंत्री ने कहा कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवा प्रदाता सभी आवश्यकताओं को पूरा करने की प्रक्रिया में है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें लाइसेंस मिल जाएगा।

सिंधिया ने पत्रकारों से कहा, ''उन्हें (स्टारलिंक को) लाइसेंस हासिल करने के लिए सभी नियमों का पालन करना होगा। आपको इसे सुरक्षा के नजरिए से भी देखना होगा। वे ऐसा करने की प्रक्रिया में हैं। एक बार सभी आवश्यकताएं पूरी हो जाने पर उन्हें लाइसेंस मिल जाएगा।'' स्टारलिंक के लाइसेंस हासिल करने की प्रक्रिया की प्रगति पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने यह बात कही। फिलहाल सरकार ने भारती समूह समर्थित वनवेब और जियो-एसईएस के संयुक्त उद्यम जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस को लाइसेंस जारी किया है।

Starlink एक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है जिसे स्पेसएक्स (SpaceX) कंपनी द्वारा विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य दुनिया के दूरस्थ यानी रिमोट और इंटरनेट-कम इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना है।

Starlink कैसे काम करता है?

Starlink में हजारों छोटे सैटेलाइट्स (उपग्रहों) का एक नेटवर्क शामिल होता है जो पृथ्वी की निम्न कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थित होते हैं। ये सैटेलाइट्स पृथ्वी के ऊपर बहुत तेज गति से घूमते हैं और एक-दूसरे के साथ जुड़े होते हैं। जब कोई यूजर Starlink इंटरनेट सेवा का इस्तेमाल करना चाहता है, तो उसे एक विशेष प्रकार की डिश एंटीना (Dish Antenna) की जरूरत होती है, जिसे "यूजर टर्मिनल" भी कहा जाता है।

डिश एंटीना का इस्तेमाल: यह डिश एंटीना आकाश में घूमते Starlink सैटेलाइट्स से सिग्नल प्राप्त करता है और उन्हें प्रोसेस कर इंटरनेट सेवा प्रदान करती है।

सिग्नल ट्रांसमिशन: सैटेलाइट्स एक-दूसरे के साथ मिलकर नेटवर्क बनाते हैं और इंटरनेट डेटा को विभिन्न जगहों तक ट्रांसमिट करते हैं। इस प्रकार यूजर का डिवाइस (जैसे कंप्यूटर या मोबाइल) इस नेटवर्क से कनेक्ट होता है और उसे इंटरनेट मिलता है।

लो-लेटेंसी इंटरनेट: क्योंकि Starlink के सैटेलाइट्स पृथ्वी की निम्न कक्षा में स्थित होते हैं, इस कारण से अन्य पारंपरिक सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की तुलना में इसकी इंटरनेट स्पीड और प्रतिक्रिया समय (Latency) बहुत अच्छा होता है।

Starlink के फायदे

दूरस्थ इलाकों में पहुंच: यह उन स्थानों तक इंटरनेट पहुंचाने में सहायक है जहां परंपरागत ब्रॉडबैंड या फाइबर इंटरनेट सेवा उपलब्ध नहीं होती।

हाई स्पीड और कम लेटेंसी: Starlink की स्पीड सामान्यतः पारंपरिक सैटेलाइट इंटरनेट से तेज होती है और यह लैगिंग (Lagging) को भी कम करती है। Starlink इंटरनेट सेवा विशेष रूप से उन इलाकों में उपयोगी साबित हो रही है, जहां इंटरनेट की कमी है।

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