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समाचारदेश Alert Star Digital Team Sep 17, 2024 10:02 PM

बुलडोजर कार्रवाई लोकतंत्र के माथे पर कलंक, उम्मीद है पीड़ितों के हक में फैसला करेगा SC- मौलाना मदनी

बुलडोजर कार्रवाई लोकतंत्र के माथे पर कलंक, उम्मीद है पीड़ितों के हक में फैसला करेगा SC- मौलाना मदनी

बुलडोजर कार्रवाई लोकतंत्र के माथे पर कलंक, उम्मीद है पीड़ितों के हक में फैसला करेगा SC- मौलाना मदनी

उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में बुलडोजर एक्शन हुआ है. उनके घरों को जमींदोज कर दिया गया. बुलडोजर एक्शन पर तमाम लोगों नाराज गी जाहिर की. सरकार के इस कदम पर विपक्ष ने सवाल उठाते हुए तीखे प्रहार किए.

वहीं जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और कोर्ट याचिका दाखिल की थी. ने मंगलवार को कोर्ट ने सुनवाई करते करते हुए बुलडोजर एक्शन पर रोक लगा दी है. कोर्ट के इस फैसले का जमीअत उलमा-ए-हिंद ने स्वागत किया है.

उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष जमीयत उलमा-ए-हिंद मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि हम अदालत के अंतरिम फैसले का स्वागत करते हैं. उन्होंने कहा कि पूरी उम्मीद है कि 1 अक्टूबर के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर जो अपना अंतिम फैसला देगी उससे उन ताकतों को गंभीर झटका लगेगा जो न्यायपालिका के रहते हुए खुद को ही कोर्ट मानकर फैसला सुना रही थीं.

‘कोर्ट का फैसला पीड़ितों के हित में होगा’

अरशद मदनी ने कहा कि आगे कहा कि कुछ लोग बुलडोजर कार्रवाई को अपना कानूनी अधिकार समझने लगे थे. उन्होंने कहा कि सॉलीसिटर जनरल के अनुरोध पर दो सप्ताह की मोहलत देते हुए कोर्ट की ये टिप्पणी भी सराहनीय है, कि इस अवधि के दौरान अदालत की अनुमति के बिना कोई घर नहीं गिराया जाएगा. मदनी ने कहा कि कोर्ट की ये कड़ी टिप्पणी इस बात का इशारा है कि इसका जो अंतिम फैसला आएगा वो न केवल पीड़ितों के हित में होगा बल्कि उससे न्यायपालिका पर विश्वास बढ़ेगा.

‘कुछ लोग खुद को कानून के ऊपर समझने लगे थे’

उन्होंने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि ये बात किसी विडंबना से कम नहीं कि सांप्रदायिक मानसिकता वाले ताकत के नशे में अपने आप को न्यायपालिका और कानून से ऊपर समझने लगे हैं, इस प्रकार की सोच इन अर्थों में घातक है कि देश का लोकतांत्रिक ढांचा जिन स्तंभों पर खड़ा है उनमें सबसे मजबूत स्तंभ न्यायपालिका है, जहां बेसहारा हो जाने वाले लोगों को अपना लोकतांत्रिक अधिकार मिलता है.

‘बुलडोर कार्रवाई लोकतंत्र के माथे पर कलंक’

मदनी ने ये भी कहा कि आज के सभ्य समाज में बुलडोर जैसी कार्रवाई लोकतंत्र के माथे पर कलंक है. देश का कोई कानून इस बात की इजाजत नहीं देता है कि केवल संदेह या आरोप के आधार पर कानूनी कार्रवाई के बिना ही किसी के घर को ध्वस्त कर दिया जाए, ये न केवल सत्ता का दुरुपयोग है, बल्कि एक विशेष वर्ग को इसका निशाना बनाकर भय की राजनीति को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है.

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आशाजनक बात ये है कि कोर्ट ने इस मामले की संवेदनशीलता और महत्व को समझा. मदनी ने कहा कि कोर्ट ने जो टिप्पणी की उससे देश के सभी न्यायप्रिय लोगों के इस पक्ष को समर्थन मिल गया है कि बुलडोजर कार्रवाई से न्याय नहीं बल्कि लोगों का खून किया जाता है.

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