होम क्या है मिशन मौसम? जिसे सरकार ने दी मंजूरी, जानिए क्यों है इसकी जरूरत
क्या है मिशन मौसम? जिसे सरकार ने दी मंजूरी, जानिए क्यों है इसकी जरूरत
जलवायु संकट के कारण मौसम का मिजाज बदला है. इसमें अनिश्चितता बढ़ी है. कहीं भारी बारिश हो रही है और बाढ़ आ रही है. तो कहीं सूखा का सामना करना पड़ रहा है. बादल फटने की घटनाएं भी बढ़ी हैं.
इसको देखते हुए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. ताकि मौसम की समय पर सटीक जानकारी मिल सके. इसके लिए एआई और मशीन लर्निंग की मदद से मौसम की हर जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी. इस कड़ी में मिशन मौसम जैसा बड़ा कदम गया उठाया है. इसके लिए 2 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा है.
इससे कृत्रिम बादल विकसित करने के लिए लैब बनाना और रडार की संख्या में 150 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी करने के साथ ही नए उपग्रह, सुपर कंप्यूटर और बहुत कुछ नई चीजें जोड़ना शामिल होगा.
क्यों है इसकी जरूरत?
अगले पांच साल में क्या होगा?
केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव का कहना है कि दो चरणों में यह पांच वर्षीय मिशन लागू किया जाएगा. पहला चरण मार्च 2026 तक जारी रहेगा. इसमें ऑब्जर्वेशन नेटवर्क के विस्तार पर फोकस किया जाएगा. इसमें करीब 70 डॉपलर रडार, अच्छे कंप्यूटर और 10 विंड प्रोफाइलर और 10 रेडियोमीटर लगाए जाएंगे. दूसरे चरण में ऑब्जर्वेशन क्षमताओं को और बढ़ाने जाएगा. इसके लिए उपग्रहों और विमानों को जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.
मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
मिशन मौसम का उद्देश्य लघु से मध्यम अवधि के मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में सुधार लाना है, जिसका फिलहाल लक्ष्य पांच से 10 प्रतिशत है. इसके साथ ही सभी प्रमुख महानगरों में वायु गुणवत्ता के पूर्वानुमान में 10 प्रतिशत तक सुधार करना है.
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