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समाचारदेशविचारकानून Alert Star Digital Team Dec 29, 2025 05:15 PM

अरावली पर सुप्रीम यू-टर्न, अपने ही आदेश पर लगाई रोक, मंत्री भूपेंद्र यादव बोले- खनन पर बैन जारी रहेगा, सरकार करेगी सहयोग

अरावली पहाड़ियों (Aravalli Range) के संरक्षण और उसकी परिभाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (29 दिसंबर, 2025) को एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने ही पिछले आदेश पर रोक (Stay) लगा दी है। कोर्ट ने अब मामले की गहराई से जांच के लिए एक नई विशेषज्ञ समिति बनाने का निर्देश दिया है।

अरावली पर सुप्रीम यू-टर्न, अपने ही आदेश पर लगाई रोक, मंत्री भूपेंद्र यादव बोले- खनन पर बैन जारी रहेगा, सरकार करेगी सहयोग

नई दिल्ली: अरावली पहाड़ियों (Aravalli Range) के संरक्षण और उसकी परिभाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (29 दिसंबर, 2025) को एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने ही पिछले आदेश पर रोक (Stay) लगा दी है। कोर्ट ने अब मामले की गहराई से जांच के लिए एक नई 'विशेषज्ञ समिति' बनाने का निर्देश दिया है। इस फैसले का केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्वागत किया है और सरकार का रुख स्पष्ट किया है।

भूपेंद्र यादव ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर अपनी प्रतिक्रिया दी:

  1. फैसले का स्वागत: उन्होंने लिखा, "मैं अरावली रेंज से जुड़े अपने आदेश पर रोक लगाने और मुद्दों का अध्ययन करने के लिए एक नई समिति बनाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्वागत करता हूं."
  2. सरकार का सहयोग: उन्होंने भरोसा दिलाया कि पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) अरावली की सुरक्षा के लिए कोर्ट की नई समिति को हर आवश्यक डेटा और सहयोग प्रदान करेगा।

खनन पर स्थिति साफ: 'नो माइनिंग'

मंत्री ने खनन को लेकर चल रहे असमंजस को भी दूर किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि:

  • प्रतिबंध जारी: मौजूदा स्थिति के अनुसार, अरावली क्षेत्र में किसी भी नई माइनिंग लीज (New Mining Lease) को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
  • रिन्यूअल पर रोक: पुराने माइनिंग लीज के रिन्यूअल (Renewal) पर भी पूरी तरह से रोक जारी रहेगी।

क्या था पिछला आदेश?

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को एक आदेश दिया था, जिसमें पर्यावरण मंत्रालय की एक समिति द्वारा सुझाई गई अरावली की एक समान परिभाषा को स्वीकार कर लिया गया था। पर्यावरणविदों को डर था कि इससे अरावली का दायरा सिमट जाएगा और खनन का रास्ता खुल जाएगा। अब कोर्ट ने उस आदेश को रोककर नए सिरे से जांच के लिए हाई-लेवल कमेटी बनाने का निर्देश दिया है, जिसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

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