होम Ayodhya Ram Mandir: चढ़ावा चोरी मामले में फिर टली सुनवाई, चंपत राय समेत इन लोगों पर FIR की मांग; अब 16 अक्टूबर को सुनवाई
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर कानूनी कार्रवाई की मांग पर सुनवाई एक बार फिर टल गई है।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर कानूनी कार्रवाई की मांग पर सुनवाई एक बार फिर टल गई है। राम मंदिर के तत्कालीन महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राय और कृष्ण मोहन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग को लेकर अधिवक्ता संघ की ओर से न्यायालय में याचिका दाखिल की गई है। मामले में प्रशासन की रिपोर्ट दाखिल नहीं होने के कारण अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 16 अक्टूबर की तारीख तय की है।
राम जन्मभूमि से जुड़े चढ़ावा चोरी के आरोपों के मामले में अधिवक्ता संघ की याचिका पर अदालत में सुनवाई होनी थी। याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(4) के तहत संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की गई है।
हालांकि, सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से रिपोर्ट पेश नहीं की जा सकी। इसके चलते अदालत ने मामले को आगे बढ़ाते हुए अगली सुनवाई की तारीख 16 अक्टूबर निर्धारित कर दी। सुनवाई टलने के बाद वादी पक्ष ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने प्रशासन की ओर से रिपोर्ट दाखिल नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। उनके मुताबिक, निर्धारित सुनवाई के दौरान रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं होने के कारण न्यायालय को अगली तारीख देनी पड़ी।
कालिका प्रसाद मिश्र ने कहा कि 16 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान अदालत से अनुरोध किया जाएगा कि यदि पुलिस प्रशासन रिपोर्ट दाखिल नहीं करता है, तो संबंधित अधिकारियों को एक से दो घंटे के भीतर तलब कर मामले की सुनवाई की जाए।
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला पहले भी चर्चा में रहा है। शुरुआती जांच के दौरान मंदिर के कई कर्मचारियों को गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई थी। वहीं, मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी लगातार उठती रही है।
अब इस मामले में न्यायालय की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होनी है। फिलहाल, संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग पर कोई अंतिम न्यायिक निर्णय सामने नहीं आया है। मामले में लगाए गए आरोपों और संबंधित पक्षों की कानूनी स्थिति का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना है।
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