होम डेब्यू में ही वॉशिंगटन सुंदर ने जीता सबका दिल, पिता को फिर भी है निराशा
डेब्यू में ही वॉशिंगटन सुंदर ने जीता सबका दिल, पिता को फिर भी है निराशा
ब्रिस्बेन (Brisbane) के गाबा मैदान में भारतीय टीम (India Team) के नए सितारे के रूप में उभरे 21 साल के ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर (Washington Sundar) के लिए पिछले 3 दिन अच्छे गुजरे हैं. भारतीय टेस्ट टीम में डेब्यू, फिर पारी में 3 बड़े विकेट और अब सबसे अहम मौके पर आकर एक मजबूत पारी खेलकर टीम को मुश्किल से बाहर निकालना. किसी भी खिलाड़ी के लिए टेस्ट करियर की ऐसी शुरुआत उसे और उस खिलाड़ी के परिवार को बेहद खुशी होगी. वॉशिंगटन सुंदर (Washington Sundar) का परिवार भी खुश है सिवाय उनके पिता एम सुंदर (M. Sundar) के.
ऑस्ट्रेलिया जैसी खतरनाक टीम के खिलाफ उसके सबसे मजबूत किले गाबा में डेब्यू करना किसी के लिए भी आसान नहीं हो सकता, लेकिन वॉशिंगटन ने अपने काम को अभी तक बखूबी अंजाम दिया है. मैच के तीसरे दिन उन्होंने 144 गेंदों पर 62 रनों की शानदार पारी खेली. इस पारी के दौरान उन्होंने कुछ रिकॉर्ड भी बनाए.
बड़े शॉट लगाकर शतक पूरा करना चाहिए था
ऐसे में टीम इंडिया (Team India) और भारतीय क्रिकेट फैन तो इतने से भी बेहद खुश हैं, लेकिन वॉशिंगटन के पिता को थोड़ी निराशा है. उनको इस बात की निराशा है कि इतनी धैर्य और संयम से भरी पारी खेलने के बावजूद वॉशिंगटन अपना शतक पूरा नहीं कर पाए. न्यूज एजेंसी IANS से बात करते हुए एम सुंदर ने कहा,
“मैं निराश हूं कि वह शतक पूरा नहीं कर सका. जब सिराज आए थे तब उसे चौके और छक्के लगाने चाहिए थे. वह यह कर सकता था. उसे पुल करना चाहिए था और बड़े शॉट्स लगाने चाहिए थे. और कुछ नहीं तो उसे ऑस्ट्रेलिया के स्कोर की बराबरी करने की कोशिश करनी चाहिए थी.”
सुदंर ने इस पारी में अपने से एक टेस्ट मैच सीनियर शार्दुल ठाकुर (Shardul Thakur) के साथ मिलकर 123 रनों की यादगार साझेदारी की. इस दौरान शार्दुल ने भी अपना पहला अर्धशतक जड़ा. दोनों ने ब्रिस्बेन के मैदान में सातवें विकेट के लिए भारत की ओर से सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड अपने नाम किया. दोनों ही खिलाड़ियों ने गेंदबाजी के दौरान 3-3 विकेट भी लिए थे.
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