होम किसानों की मोदी सरकार से मांग, कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए बुलाएं विशेष संसद सत्र
किसानों की मोदी सरकार से मांग, कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए बुलाएं विशेष संसद सत्र
आंदोलनकारी किसानों ने बुधवार को केंद्र सरकार से पांच दिसंबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी देने के अलावा तीन कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने का आग्रह किया है. क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने सिंघु बॉर्डर पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “हम तीन दिसंबर को जश्न मनाएंगे, जब कई दशक पहले भोपाल गैस त्रासदी को कॉर्पोरेट विरोधी दिवस के रूप में मनाया गया था. पांच दिसंबर को हम मोदी सरकार और कॉर्पोरेट घरानों के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे और उनके पुतले जलाएंगे.” यह एक देशव्यापी विरोध होगा, जहां किसान पुतले जलाएंगे.
उन्होंने कहा कि कलाकारों और खिलाड़ियों ने सरकार से उन्हें मिलने वाले पुरस्कारों को वापस करने का आह्वान किया है. पाल ने कहा, “हम उन लोगों को धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने सरकार को अपने पुरस्कार लौटाने की घोषणा की है और हमें उम्मीद है कि जिन लोगों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं, वे उन्हें किसान आंदोलन के साथ एकजुटता के साथ लौटाएंगे.” उन्होंने कहा कि किसान नेता लिखित रूप से सात से 10 पेज की सिफारिश देंगे, ताकि वे बता सकें कि वे कृषि कानूनों को निरस्त क्यों कराना चाहते हैं.
किसानों की सरकार से बैठक रही थी बेनतीजा
पाल ने कहा, “हम सरकार से तीन कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए संसद के विशेष सत्र को बुलाने की मांग करते हैं.” उन्होंने बताया कि मंगलवार को सरकार के साथ बैठक के दौरान, उन्हें यह प्रतीत हुआ कि सरकार ने उन्हें विभाजित करने की कोशिश की और तीनों कृषि कानूनों पर उन्हें गुमराह करने की कोशिश की. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के एक दिन पहले ही किसानों के समूहों की सरकार के साथ वार्ता हुई थी, मगर उसमें कोई समाधान नहीं निकल पाया था.
Leave A comment
महत्वपूर्ण सूचना -
भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।