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पीने के पानी को नहीं तरसेगा बुंदेलखंड और विंध्याचल
लखनऊ: बुंदेलखंड और विंध्याचल में अब पीने के पानी के लिए तरसना इतिहास में दर्ज हो जाएगा, क्योंकि केंद्र की मोदी और राज्य की योगी सरकार ने मिलकर बुंदेलखंड और विंध्याचल में 6600 से अधिक गांवों को पीने के पानी की परियोजना का शिलान्यास कर दिया है। ये शिलान्यास रविवार को किया गया। इस ऐतिहासिक कार्य से दोनों क्षेत्रों के करीब 1.17 करोड़ लोगों को पीने का साफ पानी मिलेगा। आपको बता दें कि आजादी के बाद से ये इलाका पीने के पानी के लिए तरस रहा था, वो भी तब जब, इस क्षेत्र से गंगा जैसी सदानीरा नदी बहती हैं। इसके अलावा पानी के अन्य प्राकृतिक जलस्रोत भी इन्हीं इलाकों में हैं, लेकिन इसके बावजूद भी ये इलाके प्यासे थे।
गर्मियों में बहुत अधिक बढ़ जाता था पानी का संकटबुंदेलखंड और विंध्याचल के गांवों में अक्सर पानी का संकट इस कदर बढ़ जाता था कि सरकार को सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में टैंकर से पानी पहुंचवाना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। पहली बार केंद्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार ने ना सिर्फ इस इलाके की ओर ध्यान दिया बल्कि यहां पीने के पानी की समस्या को खत्म कर दिया।केंद्र सरकार की 'हर घर नल' योजना के तहत सबसे पहले पहले 30 जून को बुंदेलखंड के सात जिलों के 3622 गांवों के 67 लाख आबादी के लिए 2185 करोड़ रुपये की योजना शुरू की गयी थी। इसके बाद 22 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने विंध्य क्षेत्र में 5,555 करोड़ रुपये की लागत से 3,000 गांवों के 40 लाख लोगों को पाइप से शुद्ध पानी देने का काम किया। दोनों परियोजनाओं को मिला दें तो इनकी लागत 7,740 करोड़ रुपये है। इनके पूरा होने पर 6,600 से अधिक गांवों के 1.17 करोड़ लोगों को शुद्ध पानी मिलने लगेगा।
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