होम मामला सुदर्शन टीवी का तो फिर निशाना डिजिटल न्यूज़ पर क्यों?
मामला सुदर्शन टीवी का तो फिर निशाना डिजिटल न्यूज़ पर क्यों?
पिछले दिनों केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में डिजिटल मीडिया को नियंत्रित करने की गुहार लगाता हुआ एक शपथपत्र सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल किया गया. इसके तुरंत बाद डिजिटल मीडिया के कटेंट को नियंत्रित करने और लोकतंत्र पर पड़ने वाले इसके असर पर बहस शुरू हो गई.
सूचना-प्रसारण मंत्रालय की ओर से अवर सचिव विजय कौशिक ने जब डिजिटल मीडिया के लिए नियमावली बनाने की अर्ज़ी अदालत में पेश की तब दरअसल सुनवाई सुदर्शन टीवी से जुड़े विवाद पर हो रही थी.
सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम 'बिंदास बोल' में भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में मुसलमानों की भर्ती को लेकर कथित तौर पर साम्प्रदायिक और विवादास्पद सामग्री प्रसारित की है. उसके प्रोमो पर ही शिकायत होने के बावजूद सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने 11 से 14 सितंबर के बीच कार्यक्रम के चार एपिसोड प्रसारित होने दिए.
जस्टिस चंद्रचूड़, जस्टिस इंदू मल्होत्रा और जस्टिस केएम जोसफ़ की बेंच सुदर्शन टीवी के खिलाफ़ दायर की गई याचिका की सुनवाई कर रही है.
शपथ पत्र दाख़िल करते हुए सरकार ने कहा कि टीवी और प्रिंट मीडिया से ज़्यादा इस वक़्त डिजिटल मीडिया को नियंत्रित करने के लिए नियम और दिशानिर्देश बनाने की ज़रूरत है.
'टीवी और प्रिंट तो ठीक है, डिजिटल को नियंत्रित करें'
अपने शपथपत्र में सरकार ने कहा कि डिजिटल मीडिया पर कोई भी संदेश प्रसारित करने के लिए सिर्फ़ एक स्मार्टफ़ोन और इंटरनेट की ज़रूरत होती है और वह संदेश देखने-सुनने के लिए भी सिर्फ़ इंटरनेट कनेक्शन के साथ फ़ोन की ज़रूरत पड़ती है. इस तरह से यूट्यूब, फ़ेसबुक जैसे माध्यमों से किसी भी प्रसारित सामग्री को 'वायरल' करवाया जा सकता है.
शपथपत्र में आगे यह भी कहा गया कि एक ओर जहाँ प्रिंट और टीवी पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों के लिए 'कोड ऑफ़ कंडक्ट' या आचार संहिता मौजूद है, वहीं डिजिटल माध्यमों में कंटेंट की कोई नियमावली नहीं है.
टीवी और प्रिंट की तरह यहां वेबसाइट शुरू करने के लिए कोई लाइसेंस भी नहीं लेना पड़ता और न ही रजिस्ट्रेशन की ही कोई प्रक्रिया है. सरकार ने वेबपोर्टल और सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले कंटेंट को समाज के लिए घातक और ख़तरनाक बताया और अदलात से वेब-स्पेस में प्रसारित होने वाली सामग्री को नियंत्रित करने के लिए नियमावली बनाने या दिशानिर्देश जारी करने पर विचार करने को भी कहा.
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