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Alert Star Digital Team Sep 13, 2020 08:00 PM

बरौनी खाद कारखाना को मिली 419.77 करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त ऋण की मंजूरी

बरौनी खाद कारखाना को मिली 419.77 करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त ऋण की मंजूरी

बरौनी खाद कारखाना को मिली 419.77 करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त ऋण की मंजूरी

बेगूसराय के बरौनी में निर्माणाधीन खाद कारखाना हिंदुस्तान उर्वरक एवंं रसायन लिमिटेड (हर्ल) में ससमय उत्पादन शुरू करने के लिए केन्द्र सरकार मिशन मोड में काम कर रही है। निर्माण मेंं कोई बाधा नहीं हो इसके लिए स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की पहल पर भारत सरकार ने रविवार को परियोजना के लिए 419.77 करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त ऋण को मंजूरी दी है। इससे 2021 तक नीम कोटेड यूरिया का व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा। यह जानकारी रविवार को गिरिराज सिंह ने दी है।

बता दें कि प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के कार्यकाल में बरौनी में हिन्दुस्तान फर्टिलाइजर खाद कारखाना बना तथा यहां का बना मोती यूरिया देशभर में चर्चित था। लेकिन 1998-1999 घाटा दिखाकर उत्पादन बंद हो गया तथा 2002 में इसे स्थाई रूप से बंद कर दिया गया। 2008 में तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं केन्द्रीय रासायन एवं उर्वरक मंत्री रामविलास पासवान ने शिलान्यास किया, लेकिन उसका निर्माण नहीं हो सका। दिवंगत सांसद डॉ. भोला सिंह ने मामले को सदन में उठाया तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नजर गई।

25 मई 2016 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे चालू करने का फैसला लिया। 25 जुलाई 2016 को वित्तीय पुनर्गठन पैकेज के तहत करीब नौ हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ करते हुए पुनरुद्धार को मंजूरी दी गई तथा 17 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने करीब सात हजार करोड़ की लागत बनने वाले शिलान्यास किया। बनाने का जिम्मा उठाने वाली इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी), कोल इंडिया, हिंदुस्तान फर्टिलाइजर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचएफसीएल) एवं फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) तत्परता से लगी हुई है तथा कारखाना का 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है।

उम्मीद है कि कारखाना का निर्माण इस साल के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। उसके बाद जुलाई 2021 से यहां प्रत्येक दिन 3850 मीट्रिक टन नीम कोटेड यूरिया (प्रत्येक वर्ष 12.70 लाख एमटी) तथा 22 सौ टन अमोनिया का व्यवसायिक उत्पादन होगा। बरौनी में उत्पादन शुरू हो जाने से पूर्वोत्तर राज्यों को भी आसानी से रेल और रोड के माध्यम खाद उपलब्ध हो सकेगा। जिससे यातायात दबाव भी कम होगा। अभी बिहार में वेस्टर्न एंड सेंट्रल रीजन से रेल समेत अन्य यातायात साधनों के जरिए रसायनिक उर्वरकों और यूरिया की आपूर्ति होती है।

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