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प्रशांत भूषण से जज बोले- माफी मांगने में बुराई क्या है, गांधी जी भी तो ऐसा करते थे
प्रशांत भूषण और अदालत की अवमानना वाले मामले में सस्पेंस बढ़ता जा रहा है. प्रशांत भूषण अवमानना का दोषी करार देने के बाद भी माफी न मांगने पर अड़े हैं. बीते 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने जोरदार बहस के बाद प्रशांत भूषण को चार दिन का समय दिया ताकि वो माफ़ी मांगकर केस ख़त्म कर सकें. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके बाद 24 अगस्त यानी मंगलवार को फिर से वकीलों की जिरह हुई. जजों की टिप्पणियां भी काफी गहरी रहीं, रोचक भी. जानते हैं कि किसने क्या कहा-
राजीव धवन, प्रशांत भूषण के वकील
# हम नहीं चाहते कि कोई फैसला आने के बाद कुछ लोग भूषण को शहीद दर्जा देने लगें और कुछ कोर्ट के फैसले की तारीफ में लग जाएं. हम सिर्फ ये चाहते हैं कि ये केस ख़त्म हो, विवाद ख़त्म हो. और वो न्यायपालिका के बड़प्पन दिखाने से ही संभव है.
# लॉर्डशिप, जब आप रिटायर होंगे या नहीं भी होंगे, तो तमाम बातें होंगी, जो कहेंगी कि कोर्ट ने फलां मामले में सही फैसला किया, या फलां मामले में नहीं किया. इसे रोका नहीं जा सकता. न्यायालय का तो अस्तित्व ही ज़िम्मेदार आलोचना पर टिका है.
# मैं हमेशा दो ज़िम्मेदारियों में रहता हूं. पहली- मेरी क्लाइंट के प्रति. दूसरी- कोर्ट के प्रति. ये दोनों मेरे लिए एक नहीं हैं. मैं इनमें घालमेल नहीं करता.
# लेकिन ये सुप्रीम कोर्ट का तरीका नहीं है कि- 'हम आपको इतने दिन दे रहे हैं, माफी मांग लीजिए.' ये ग़लत न्यायशास्त्र है. इस तरह से फैसला नहीं सुनाया जा सकता.
केके वेणुगोपाल, अटॉर्नी जनरल
# (राफेल केस में वेणुगोपाल और भूषण आमने-सामने थे. तब का ज़िक्र करते हुए वेणुगोपाल बोले) उस वक्त उन्होंने (भूषण ने) माफी मांग ली थी. मैंने उनका बयान पढ़ा तो अवमानना का मामला वापस ले लिया था. अदालत अगर उनके प्रति उदारता दिखाते हुए इस बात को भी यहीं छोड़ती है तो बड़ा उदाहरण पेश होगा.
# पहले भी कई बार कई रिटायर्ड जज या सुप्रीम कोर्ट के कई वकील इस तरह के बयान दे चुके हैं या न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की बात उठा चुके हैं. ऐसे में सिर्फ अब भूषण पर कार्रवाई ज़रूरी नहीं.
# प्रशांत भूषण ऐसा दोबारा नहीं करेंगे. अदालत चाहे तो 'ऑफ द रिकॉर्ड' उनका बयान दर्ज कर सकती है.
जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच
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