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कुवैत ने लगाई भारतीयों के प्रवेश पर रोक
कुवैत की सरकार के इस फ़ैसले से वहां काम करने वाले भारतीय और उनके परिवार बेहद फ़िक्रमंद हैं.
भारतीय निर्माण कंपनी लार्सन एंड टुब्रो में काम करने वाले वार्ष्णेय प्रताप नारायन फ़रवरी में छुट्टियों में कुवैत से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में अपने घर आए थे और तबसे यहीं फँसे हुए हैं, और अब ये नया मसला खड़ा हो गया है.
वार्ष्णेय कहते हैं, "चार अगस्त को दिल्ली से मेरी फ़्लाइट बुक है, जिसके पहले मुझे गोरखपुर से लखनऊ जाकर कोविड-19 (पीसीआर) टेस्ट भी करवाना है और अब ये कंफ्यूज़न पैदा हो गया है."
पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर वार्ष्णेय प्रताप नारायन कहते हैं कि पिछले चार माह से वो 'विदाउट-पे' हैं और ज़ाहिर है कि वो चाहते हैं कि मसला जल्द से जल्द हल हो.
इंडिया कम्यूनिटी स्पोर्ट ग्रुप के अध्यक्ष राजपाल त्यागी ने कुवैत से फ़ोन पर कहा कि इस फ़ैसले से उन हज़ारों लोगों की नौकरियां चली जाएंगी जो भारत जाकर वहां महामारी की वजह से फँस गए हैं, ऐसे सैकड़ों परिवार हैं जिनके कुछ लोग कुवैत में रह गए हैं और कुछ भारत जाकर फँस गए हैं, और अब वो सब वापस आना चाहते हैं.
राजपाल त्यागी कहते हैं कि छुट्टियों पर गए लोग वापस नहीं पहुँचे तो उनकी नौकरियां जा सकती हैं, बहुत सारे लोगों का वीज़ा ख़ात्मे पर है अगर वो न आ पाए तो वो कैंसिल हो जाएगा, बिज़नेसमैन का यहां काम करने का लाइसेंस वीज़ा से जुड़ा है जिसकी वजह से एक के कैंसिल हो जाने से दूसरा भी समाप्त हो जाएगा, परिवार का मामला तो है जिसका मानसिक दबाव यूं समझा जा सकता है कि कई मामलों में पती भारत में फँसे हैं तो पत्नी यहां.
इंडिया कम्यूनिटी स्पोर्ट ग्रुप ने इस सिलसिले में सोमवार को कुवैत दूतावास के अधिकारियों से मुलाक़ात की थी.
मंगलवार को उनलोगों ने इस सिलसिले में प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को चिट्ठी भी लिखी है और सरकार से भारत से कुवैत के लिए विमान सेवा बहाल करने की अपील की है.
कुवैत में मौजूद सूत्रों और भारत सरकार के बयानों से ये समझा जाता है कि भारतीय नागरिकों के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध की एक बड़ी वजह दोनों देशों, भारत और कुवैत के बीच विमानों की उड़ान को लेकर उपजा कलह भी हो सकता है.
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